मप्र हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि सड़क सुपरविजन के लिए अयोग्य टीम लीडरों की नियुक्ति करने वालों पर क्या कार्रवाई की गई है। चीफ जस्टिस रवि विजय मलिमथ व जस्टिस डीके पालीवाल की युगलपीठ ने मामले में शासन को शपथ पत्र पर जवाब पेश करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है।
भोपाल निवासी पत्रकार नीरज निगम की तरफ से दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन चीफ इंजीनियर जीपी कटारे द्वारा प्राइवेट कंपनियों से मिली भगत करके अयोग्य व्यक्तियों की नियुक्ति की गई थी। जिसकी शिकायत उनके द्वारा की गई थी, जिस पर अयोग्य व्यक्तियों को हटा दिया गया था। इतना ही नहीं उन व्यक्तियों को काम पर रखने वाली कंपनियों को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया, किंतु उन नियुक्ति को अनुमोदन करने वाले अधिकारी के खिलाफ सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। मामले में आवेदक की ओर से कहा गया कि पूर्व में सरकार ने जवाब के लिए समय लिया था, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने उप महाधिवक्ता को निर्देशित किया है वे शपथपत्र पर बताएं कि याचिकाकर्ता की शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पैरवी की।