मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बेंच हंटिंग पर नियंत्रण रखने के उद्देश्य से 16 माह पूर्व पारित आदेश को रिकॉल कर लिया है। चीफ जस्टिस रवि मलिमठ ने 10 मई 2022 को रजिस्ट्री को आदेश दिए थे कि अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह के प्रकरणों को उनकी कोर्ट में लिस्ट न किया जाये। उक्त आदेश पर पुनर्विचार के लिए एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एण्ड सोशल जस्टिस की तरफ से याचिका दायर की गयी थी।
याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि चीफ जस्टिस के उक्त आदेश का फायदा उठाते हुए कई अधिवक्ता बेंच हंटिंग का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने दलील दी कि जो अधिवक्ता अपना प्रकरण चीफ जस्टिस की कोर्ट में नहीं लगवाना चाहते, वे मामले में अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह का वकालतनामा पेश कर देते हैं। इस तरह उक्त आदेश को न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग का हथियार बना लिया गया है। ऐसा करना न्यायिक प्रशासन के लिए उचित नहीं हैं।
मामले पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में बेंच हंटिंग के संबंध में दी गई दलीलें उचित हैं। युगलपीठ ने कहा कि इस याचिका में भी जिन अधिवक्ताओं ने वकालतनामा पेश किये हैं, वे स्वयं बेंच हंटिंग में शामिल हैं, इसलिए पूर्व में लगाए गए प्रतिबंधात्मक आदेश को वापस लिया जाना उचित है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर व विनायक शाह ने पक्ष रखा।