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Jabalpur: पहले किसी और के नाम पर गया था जेल, अब कोर्ट ने फिर भेजा अंदर, न्यायालय से धोखाधड़ी का मामला

Mon, 19 Dec 2022 06:16 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

जबलपुर में धोखाधड़ी के आरोपियों ने कोर्ट से धोखाधड़ी की थी। दोषी होने पर अपनी जगह किसी और को जेल भेज दिया था। जब वह जमानत पर बाहर आया तो उसने पुलिस को मामले की शिकायत की थी। कोर्ट ने आरोपी शिकायतकर्ता को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। 
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(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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धोखाधड़ी के प्रकरण में तीन दोषी व्यक्ति के स्थान पर दूसरे व्यक्ति व्यक्ति जेल गए थे। जमानत पर रिहा होने के बाद एक व्यक्ति ने शिकायत की थी। जांच के बाद पुलिस ने शिकायतकर्ता सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। पुलिस ने उक्त प्रकरण में शिकायतकर्ता को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। न्यायालय ने आरोपी शिकायकर्ता को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है।
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गौरतलब है कि कोमल पांडे (45) निवासी आमनपुर ने 13 अप्रैल 2022 को पुलिस अधीक्षक जबलपुर सिद्धार्थ बहुगुणा से शिकायत की थी कि ठेकेदार अमित खम्परिया ने कान्हा में वन विभाग का नाका साल 2011 में लिया था। टोल नाका में पर्यटकों से अधिक शुल्क लिया जाता था। अधिक शुल्क की राशि को मार्कर से मिटा कर सही कर दिया जाता था। शिकायत पर मंडला जिले की खटिया थाना ठेकेदार अमित खम्परिया, उसके पिता अनिरुद्ध प्रताप चतुर्वेदी सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं के तहत दो प्रकरण दर्ज किए थे। आरोपियों को प्रकरण में जमानत मिल गई थी। 

अमित खम्परिया कोमल पांडे तथा अन्य 3-4 लोगों को लेकर 15 सितंबर 2021 को नैनपुर कोर्ट पहुंचा था और कोर्ट रूम में कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करवाए थे। इसके बाद अमित खम्परिया के गुर्गे उसे तथा उन्हीं लोगों को लेकर 22 सितम्बर 2021 को नैनपुर कोर्ट पहुंचे। नैनपुर कोर्ट के एडीजे ने धोखाधड़ी के मामले में पांच व्यक्तियों को पांच-पांच साल की सजा से दंडित किया। प्रकरण में आरोपी बनाए गए एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि 6 व्यक्ति फरार थे। न्यायालय में उससे अनिरुद्ध प्रताप चतुर्वेदी (70) के नाम से हस्ताक्षर करवाए गए थे। हस्ताक्षर करवाने के बाद पुलिस उसे गिरफ्तार कर जेल ले गई। इसके अलावा दोषी करार दिए गए दो अन्य व्यक्तियों के स्थान पर दो अन्य व्यक्तियों को जेल भेज गया था।
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नैनपुर जेल में उसने अपना सही नाम बताया तो जेल अधिकारी ने उसकी बात नहीं मानते हुए कहा कि तुम अनिरुद्ध प्रताप चतुर्वेदी हो। प्रकरण में 84 दिनों बाद उसे हाईकोर्ट से जमानत का लाभ मिला। जिसके बाद ठेकेदार अमित खम्परिया ने इस संबंध में किसी को कुछ बताने पर परिवार से जान से मारने की धमकी दी थी। जेल से रिहा होने के चार माह बाद मनोस्थिति ठीक होने पर शिकायत दर्ज करवाई है।

पुलिस अधीक्षक जबलपुर ने शिकायत की जांच सीएसपी बरगी प्रियंका शुक्ला को सौंपी थी। जांच के दौरान मंडला जेल से आरोपियों के फोटो मंगवाए गए थे। फोटो की पहचान करने पर पाया गया कि अनिरुद्ध चतुर्वेदी, रामजी द्विवेदी तथा दशरथ तिवारी कभी मंडला जैल में निरुद्ध नहीं थे। उनके स्थान पर कोमल पांडे, श्याम सुंदर खम्परिया तथा विराट तिवारी निरुद्ध थे। शिकायतकर्ता के फिंगर प्रिंट की जांच नेफिट सॉफ्टवेयर के माध्यम से की गई। जिसमें पाया गया कि उक्त फिंगर फिंट न्यायालय द्वारा सजा से दंडित अनिरुद्ध चतुर्वेदी के हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर मंडला के नैनपुर थाने में 2 दिसंबर को शिकायतकर्ता कोमल पांडे, अमित खम्परिया, अनिरुद्ध चतुर्वेदी, रामजी द्विवेदी, दशरथ तिवारी, विराट तिवारी, श्याम सुंदर सहित अन्य अज्ञात व्यक्यिों के खिलाफ धारा 417, 419, 420, 466, 467, 471, 506, 120बी तथा 34 के तहत अपराध दर्ज किया था।

नैनपुर थाना प्रभारी आरएम दुबे ने बताया कि प्रकरण में कोमल पांडे को गिरफ्तार कर सोमवार को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया था। न्यायालय ने आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश दिए थे। प्रकरण में अन्य आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। प्रकरण की जांच में अन्य व्यक्ति की भूमिका प्रकाश में आती है तो उनके खिलाफ भी विधिवत जांच की जाएगी।
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