जबलपुर के खजरी-खिरिया बायपास स्थित स्क्रैप यार्ड में ब्लास्ट के बाद हुई जांच के दौरान सेना के उपयोग में आने वाले बमों के खोखे का जखीरा मिला था। सेना की मदद से हजारों की संख्या में मिले खोखे को खमरिया डिमोलिशन ग्राउंड में नष्ट किया गया। इसके लिए चार दिन का विशेष अभियान चलाया गया था।
पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप सिंह से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 25 अप्रैल को स्क्रैप यार्ड में हुए ब्लास्ट की जांच एनएसजी द्वारा की गई थी। जांच के दौरान यार्ड से सेना में उपयोग होने वाले बड़े तथा छोटे बमों के खाली खोखे मिले थे। यह बमों के खोखे यार्ड तक कैसे पहुंचे, इसकी जांच जारी है। यार्ड में 30 एमएम बम के दो हजार से अधिक खाली खोखे मिले थे। इसके अलावा 125 एमएम बम के 180 खोखों मिले थे। इसके अलावा अन्य साइज के भी बमों के खोखे मिले थे।
उन्होंने बताया कि ब्लास्ट के बाद दो लोग लापता थे। यार्ड में मिलने मानव अंगों को डीएनए जांच के लिए भेजा गया था, जिसमें से लापता खलील की डीएनए रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। दूसरे लापता युवक भोला की रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। भोला के गुमशुदा होने के रिपोर्ट अधारताल थाने में दर्ज की गयी थी। उन्होंने बताया कि स्क्रैप यार्ड संचालक मोहम्मद शमीम की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हो पाई है। उसके संभावित ठिकानों में दबिश जारी है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर इनाम घोषित किया है। घटना की जांच एनएसजी के द्वारा की गयी थी। इसके बावजूद भी परिसर पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो पाया था।
जिला कलेक्टर ने घटनास्थल में बचे हुए विस्फोटक अवशेषों को हटाने के लिए मुख्यालय मध्य भारत से आग्रह किया गया था। मेजर जयदीप के नेतृत्व में सीओडी जबलपुर की टीम ने बचे हुए विस्फोटक अवशेषों को साफ करते हुए खमरिया डिमोलिशन ग्राउंड में उन्हें नष्ट किया। इस कार्य के लिए 13 से 16 मई तक विशेष अभियान के तहत कार्रवाई की गयी थी। जीओसी मध्य भारत लेफ्टिनेंट जनरल पी एस शेखावत ने इसके लिए पूरी टीम को बधाई दी है।
एएसपी सोलानी दुबे ने बताया कि पुलिस द्वारा जब्त किये गये खाली खोखे नीलामी के माध्यम से खरीदे गये थे। खाली बमों के खोखे की खरीदी अलग-अलग समय में अलग-अलग फर्म के माध्यम से की गयी थी। बेटे फहीम, सुपर वाइलर सुल्लान तथा खुद के नाम से पंजीकृत फर्म के नाम से विगत दस सालों में उक्त खरीदी की गयी थी। अलग-अलग फर्म के माध्यम से खरीदी करने के संबंध में भी जांच जारी है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि सेना का स्क्रैप खरीदी करने के लिए सेल कंपनी तो गठित नहीं की गयी है।