आदेश के अनुपालन में पेश किया गलत प्रतिवेदन
मप्र हाईकोर्ट में दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान पूर्व में पारित आदेश के परिपालन में गलत प्रतिवेदन पेश किए जाने को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने रवैये पर नाराजगी जाहिर करते हुए खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी पर 25 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि यह राशि अधिकारी स्वयं वहन करेगी और इसकी प्रतिपूर्ति सरकारी खजाने से नहीं की जाएगी।
मनीष व्यास सहित अन्य की तरफ से दायर अवमानना याचिका में कहा गया था कि पूर्व में दायर की गई याचिका की सुनवाई करते हुए 27 मार्च 2025 को याचिकाकर्ता के नियमितिकरण पर विचार करने के आदेश जारी किए थे। विभाग द्वारा उनके नियमितिकरण पर विचार नहीं करते हुए 11 जून 2026 को अक्टूबर 2016 की विनियमितीकरण योजना का लाभ देते हुए उन्हें स्थायी कर्मी घोषित कर दिया। सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में परिपालन रिपोर्ट पेश की गई थी। याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि हाईकोर्ट ने नियमितिकरण पर विचार करने के आदेश जारी किए। नियमितीकरण पर विचार नहीं करते हुए विभाग के द्वारा उन्हें स्थाई कर्मी घोषित किया गया है।
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बिना शर्त माफी मांगी
याचिका की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव शमी ने स्वीकार किया कि गलत आदेश और त्रुटिपूर्ण अनुपालन प्रतिवेदन प्रस्तुत हो गया था। उन्होने इसके लिए बिना शर्त माफी मांगते हुए रिपोर्ट वापस लेने की अनुमति प्रदान करने का आग्रह किया। एकलपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव जैसे वरिष्ठ अधिकारी से ऐसी त्रुटिपूर्ण अनुपालन रिपोर्ट की अपेक्षा नहीं की जा सकती। एकलपीठ ने रिपोर्ट वापस लेने की अनुमति प्रदान करते हुए गलती के लिए 25 हजार रुपये की व्यक्तिगत जुर्माना लगाते हुए राशि सात दिन के भीतर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के खाते में जमा करने का निर्देश दिया गया। इसी मामले में दायर रिट अपील लंबित होने और उसमें नोटिस जारी होने के मद्देनजर अदालत ने अवमानना प्रकरण की सुनवाई स्थगित करते हुए जुलाई के तीसरे सप्ताह में निर्धारित की है।