मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने डॉक्टरों की प्रदेशव्यापी हड़ताल को अवैधानिक करार दिया है।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने बुधवार से प्रारंभ हुई डॉक्टरों की प्रदेशव्यापी हड़ताल को अवैधानिक करार दिया है। युगलपीठ ने डॉक्टरों को तत्काल काम पर लौटने के निर्देश दिए हैं। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि हाईकोर्ट को बिना सूचना दिए भविष्य में डॉक्टर हड़ताल नहीं करेंगे।
याचिकाकर्ता इंदरजीत सिंह शेरू की तरफ से फरवरी 2023 में दायर याचिका में डॉक्टरों की अनिश्चित प्रदेश व्यापी हड़ताल को चुनौती दी गई थी। याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि डॉक्टर द्वारा अपनी मांगों के समर्थन में बुधवार से प्रदेशव्यापी हड़ताल शुरू कर दी गई है। इसके कारण प्रदेश के 13 मेडिकल कॉलेज सहित जिला अस्पताल तथा स्वास्थ केन्द्र में चिकित्सा सेवाएं ठप्प हो गई हैं। लोगों को उपचार नहीं मिल रहा है और वे भटक रहे हैं।
याचिकाकर्ता की तरफ से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल तथा अधिवक्ता राहुल गुप्ता ने युगलपीठ को बताया कि हाईकोर्ट द्वारा 25 जुलाई 2018 को पारित आदेश में चिकित्सा सेवा को अतिआवश्यक सेवा घोषित करते हुए कहा था कि चिकित्सा सेवा के कर्मचारी सामूहिक अवकाश तथा हड़ताल पर नहीं जा सकते हैं। जूनियर डॉक्टर की हड़ताल को भी अवैधानिक करार देते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें 24 घंटों में काम पर लौटने के निर्देश दिए थे। आदेश का पालन नहीं करने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए थे।
अनावेदक डॉक्टर एसोसिएशन की तरफ से पैरवी करते हुए अधिवक्ता आदित्य संघी ने बताया कि केन्द्र सरकार ने साल 2008 में डीएसीपी लागू करने के निर्देश दिए थे। देश के अन्य प्रदेश में इसे लागू कर दिया है, परंतु मध्य प्रदेश में लागू नहीं किया है। इसके अलावा शासकीय अस्पताल में ब्यूरोकेट का अधिक दखल रहता है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद अपने आदेश में कहा है कि कोरोना महामारी खत्म नहीं हुई है। कोरोना से संक्रमित मरीज लगातार मिल रहे हैं। इसके अलावा शासकीय अस्पतालों में भी स्वास्थ सेवाएं ठप हो गई हैं और गरीब वर्ग के लोगों को उपचार नहीं मिल रहा है। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी किए। युगलपीठ ने अनावेदक डॉक्टर एसोसिएशन को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। विस्तृत आदेश प्रतीक्षित है।