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Court News: रोजगार कार्यालय का जीवित पंजीयन नहीं होने पर डिस्क्वॉलिफाई,पुलिस भर्ती के अभ्यर्थियों को मिली राहत

Tue, 13 Jun 2023 10:10 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से पुलिस अभ्यार्थियों को बड़ी राहत मिली है। जस्टिस शील नागू और जस्टिस डीके बसंल की युगलपीठ ने आवेदकों की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए उनके मामलों पर पुनर्विचार करते हुए नौकरी देने की कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। युगलपीठ ने 60 दिन की समय सीमा निर्धारित की है।
 
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जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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जबलपुर एकलपीठ के आदेश के खिलाफ रक्षा पटेल सहित 14 लोगों की तरफ से दायर अपील में कहा गया कि वे पुलिस कांस्टेबल रिक्रूटमेंट 2020 में सफल हुए थे। उन्होंने शारीरिक सौष्टवता की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली थी। इसके बावजूद भी उन्हें डिसॉक्वालीफाई कर दिया था। पुलिस विभाग ने यह कारण बताया कि उनके पास रोजगार कार्यालय का जीवित पंजीयन नहीं है।

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इस आदेश को चुनौती देते हुए सभी अपीलार्थियों ने उच्च न्यायालय की शरण ली थी, लेकिन उक्त याचिका हाईकोर्ट की एकलपीठ ने निरस्त कर दी और सिर्फ एक याचिकाकर्ता को लाभान्वित किया, जिसका पंजीयन जीवित था। एकलपीठ के आदेश के खिलाफ यह अपील दायर की गई थी। युगलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि रोजगार कार्यालय से पंजीयन जीवित होना शासकीय नौकरी प्राप्त करने के लिए कोई प्रासंगिक एवं अनिवार्य आवश्यकता नहीं है, जिसके बिना शासकीय नौकरी न दी जा सके। 

रोजगार का पंजीयन जीवित होने की शर्त ही सेवा शर्तों के अनुकूल नहीं है। युगलपीठ ने एकल पीठ का निर्णय निरस्त करते हुए पुलिस विभाग को यह आदेश दिया गया है कि वे सभी अपीलार्थीगणों को 60 दिन के अंदर नौकरी देने की कार्रवाई करें। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता एनएस रूपराह ने पैरवी की।

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