याचिका में कहा गया है कि मध्य प्रदेश में अधिवक्ताओं का अंतिम वेरिफिकेशन वर्ष 2016 में हुआ था। इसके बाद वेरिफिकेशन नहीं कराया गया, जबकि इसी अवधि में राज्य अधिवक्ता परिषद और विभिन्न बार एसोसिएशनों के चुनाव करा दिए गए।
मध्य प्रदेश में प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ताओं का अनिवार्य वेरिफिकेशन कराए बिना राज्य अधिवक्ता परिषद और विभिन्न बार एसोसिएशनों के चुनाव कराए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई सितंबर में होगी।
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याचिकाकर्ता अधिवक्ता परमानंद साहू की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ताओं का वेरिफिकेशन कराए बिना बार काउंसिल और बार एसोसिएशनों के चुनाव कराए गए, जो नियमों के विपरीत और अवैध हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अभिताव गुप्ता ने अदालत को बताया कि प्रैक्टिस एडवोकेट रूल्स-2015 के तहत अधिवक्ताओं का वेरिफिकेशन अनिवार्य है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कितने अधिवक्ताओं का निधन हो चुका है, कितनों ने वकालत छोड़ दी है और वर्तमान में सक्रिय रूप से प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं की प्रमाणित सूची तैयार की जा सके।
याचिका में कहा गया है कि मध्य प्रदेश में अधिवक्ताओं का अंतिम वेरिफिकेशन वर्ष 2016 में हुआ था। इसके बाद वेरिफिकेशन नहीं कराया गया, जबकि इसी अवधि में राज्य अधिवक्ता परिषद और विभिन्न बार एसोसिएशनों के चुनाव करा दिए गए।
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि बिना वेरिफिकेशन कराए संपन्न कराए गए चुनावों को अवैध घोषित कर निरस्त किया जाए। सुनवाई के बाद खंडपीठ ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट एडवोकेट बार एसोसिएशन और जिला बार एसोसिएशन, जबलपुर सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।