हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे पिता और उसके दो बेटों को हाईकोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन के साक्ष्यों में कई विरोधाभास और गंभीर खामियां पाईं। कोर्ट ने जेल में निरुद्ध एक आरोपी को तत्काल रिहा करने के आदेश भी दिए हैं।
मामला टीकमगढ़ जिले के निवाड़ी का है। राजेंद्र यादव और उसके बेटे सत्येंद्र यादव व जितेंद्र यादव को हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ तीनों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
2015 में हुई थी हत्या
अभियोजन के अनुसार 13 नवंबर 2015 की रात आपसी विवाद के बाद आरोपियों ने तीन अज्ञात लोगों के साथ मिलकर परमानंद यादव को घर से बाहर बुलाया और लाइसेंसी बंदूक, तलवार, फरसा व लाठी से हमला किया। बीच-बचाव करने आए परिवार के अन्य सदस्यों पर भी हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल परमानंद की उपचार के दौरान मौत हो गई थी।
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अभियोजन के साक्ष्यों में मिली खामियां
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि मामले में तीन अज्ञात आरोपियों का उल्लेख होने के बावजूद उनके संबंध में धारा 173(8) के तहत आगे की जांच का रिकॉर्ड नहीं था। कोर्ट ने यह भी पाया कि पांच घायल गवाहों की मेडिकल रिपोर्ट केस फाइल में होने के बावजूद उन्हें विधिवत पेश और साबित नहीं किया गया। इसके अलावा घटना में इस्तेमाल बताए गए हथियारों को पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर के समक्ष पेश नहीं किया गया। घायल परिजनों और अन्य गवाहों के बयानों में भी हथियारों और हमले को लेकर विरोधाभास सामने आए।
एक बेटा घटना के समय अस्पताल में था
हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपी जितेंद्र घटना के आसपास की अवधि में अस्पताल में भर्ती था। डॉक्टरों, नर्स और वार्ड बॉय के बयानों तथा अस्पताल के दस्तावेजों से उसके भर्ती होने की पुष्टि हुई। कोर्ट ने इस तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना कि घटना के समय उसकी मौजूदगी को लेकर अभियोजन का मामला संदेह से परे साबित नहीं हुआ। वहीं, राजेंद्र यादव ने घटना के समय खेत में सिंचाई करने की बात कही थी। पुलिस ने उसकी लाइसेंसी बंदूक जब्त की थी, लेकिन इससे हत्या में उसके इस्तेमाल की बात निर्णायक रूप से साबित नहीं हुई।
अभियोजन आरोप साबित करने में रहा नाकाम
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। साक्ष्यों में मौजूद विरोधाभास और अभियोजन की कमियों का लाभ आरोपियों को दिया गया। कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार सत्येंद्र करीब 2 साल 10 महीने और राजेंद्र करीब 1 साल 8 महीने जेल में रहे, जबकि दोनों वर्तमान में जमानत पर हैं। जितेंद्र करीब 10 साल 6 महीने से जेल में है। हाईकोर्ट ने तीनों को दोषमुक्त करते हुए जेल में निरुद्ध जितेंद्र को तत्काल रिहा करने के आदेश दिए हैं। हालांकि, किसी अन्य मामले में उसकी आवश्यकता होने पर यह आदेश लागू नहीं होगा।