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Jabalpur News: मृत्यु पूर्व बयान दोषसिद्धि का आधार, पत्नी हत्या मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Sat, 13 Dec 2025 08:05 AM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

पत्नी की हत्या के दोषी पति की अपील हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। जस्टिस विवेक अग्रवाल व रामकुमार चौबे की युगलपीठ ने कहा कि बिना पुष्टि के भी मृत्यु पूर्व बयान दोषसिद्धि का पर्याप्त आधार है। जिला न्यायालय की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है।

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जबलपुर हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पत्नी की हत्या के अपराध में सजा से दंडित किये जाने के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस राम कुमार चौबे की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि बिना किसी पुष्टि के भी मृत्यु पूर्व बयान दोषसिद्धि का आधार है। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ जिला न्यायालय द्वारा आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है।
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नरसिंहपुर जिले के सिंहपुर बड़ा निवासी अमित चौकसे की तरफ से दायर अपील पत्नी की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा से दंडित किये जाने को चुनौती दी गई थी। अपीलकर्ता की तरफ तर्क दिया गया कि पारिवारिक विवाद के कारण पति से विवाद हो गया था। विवाद के कारण पत्नी के स्वयं आग लगा ली थी। जिला न्यायालय में प्रकरण की सुनवाई के दौरान सभी अभियोजन गवाह पक्ष विरोधी हो गये थे। अचानक विवाद होने के कारण घटना घटित हुई थी तो प्रकरण गैर इरादतन हत्या का मामला बनता है।

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युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान मृतका के पिता ने पुलिस को सूचित किया था कि उसके बेटे ने अपनी पत्नी पर केरोसिन तेल डालकर जला दिया है। पत्नी ज्योति ने भी मृत्यु पूर्व बयान में कहा था कि उसके पति ने केरोसिन तेल डालकर उसे जलाया है। उसका विवाद 12 साल पूर्व हुआ था और पति उसके साथ शराब के नशे में अक्सर मारपीट करता था। सुनवाई के दौरान आरोपी की बात-पिता और रिश्तेदार अपने बयान से मुकर गये। इसके अलावा आरोपी की सास तथा साला ने भी अपने बयान में कहा है कि उन्होंने घटना होते हुए नहीं देखी। उसका आरोपी से समझौता हो गया है और वह दोनों बच्चों की अच्छे से देखभाल करते हुए पढ़ाई करवाएगा। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि न्यायालय को मृत्युपूर्व बयान किसी दबाव में दर्ज नहीं करवाया गया है और न्यायालय को उस पर भरोसा है कि बिला साक्ष्य के भी दोषसिद्धि का आधार है। आरोपी के पिता ने घटना के संबंध में पुलिस को सूचित किया था। युगलपीठ ने उक्त आदेष के साथ अपील को खारिज कर दिया।

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