किसी भी आपराधिक प्रकरण में सजा से दंडित नहीं होने के बावजूद जिला बदर की कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने कलेक्टर और संभाग आयुक्त के आदेश को मनमाना तथा विधि विरुद्ध करार देते हुए आदेश को खारिज कर दिया। एकलपीठ ने सरकार पर 25 हजार का जुर्माना लगाते हुए उक्त राशि याचिकाकर्ता के बैंक खाते में जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता छिंदवाड़ा निवासी भूरा कौरव की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उसके खिलाफ साल 2008 से 2023 के बीच आईपीसी की धाराओं के तहत 14 अपराधिक तथा सीआरपीसी की धारा 110 के तहत तीन प्रकरण हुए थे। पांच अपराधिक प्रकरण जुआ एक्ट के तहत दर्ज हुए थे। उसके खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई हुई थी। दर्ज अधिकांश आपराधिक प्रकरण में वह दोषमुक्त हो गया है। इसके बावजूद जिला कलेक्टर ने 30 अक्तूबर 2024 को उसके विरुद्ध जिला बदर का आदेश पारित किया था।
याचिका में कहा गया था कि आदेश में एक आपराधिक प्रकरण को लंबित बताया गया है, जिसमें वह दोषमुक्त हो गया है। इसके अलावा आदेश पारित करते के पहले जिला कलेक्टर ने किसी भी गवाह के बयान भी दर्ज नहीं किए। जिला कलेक्टर के आदेश को चुनौती देते हुए उसने संभागायुक्त जबलपुर के समक्ष अपील दायर की थी। संभागायुक्त के द्वारा अपील खारिज किए जाने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है।
हाईकोर्ट ने कलेक्टर और संभाग आयुक्त के आदेश को मनमाना और विधि संगत नहीं पाते हुए उसे निरस्त कर दिया। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि मध्य प्रदेश राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 के दिये प्रावधानों का पालन नहीं करते हुए विधि विरुद्ध आदेश जारी किये है। एकलपीठ ने जिला बदर के आदेश को निरस्त करते हुए सरकार पर 25 हजार का जुर्माना लगाते हुए उक्त राशि का चेक आवेदक को प्रदान करने के निर्देश जारी किए हैं।