नर्मदापुरम कलेक्टर ने व्यक्तिगत उपस्थिति माफी के लिए हाईकोर्ट को सीधे पत्र लिख दिया था। इस पर हाईकोर्ट जस्टिस जी एस अहलूवालिया ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि कलेक्टर की इस गलती पर गंभीरता से कार्यवाही करें। मुख्य सचिव को एक माह के भीतर कार्यवाही की जानकारी कोर्ट को देने का निर्देश दिया गया है। एकलपीठ ने नर्मदापुरम एडीएम और तहसीलदार की न्यायिक और मजिस्ट्रियल शक्तियां एक साल के लिए वापस लेने के निर्देश दिए हैं।
अतिरिक्त कलेक्टर ने हाईकोर्ट को दिया लिफाफा
इसी दौरान अतिरिक्त कलेक्टर देवेंद्र कुमार सिंह ने खड़े होकर एक लिफाफा दिखाया। जस्टिस अहलूवालिया ने सरकारी अधिवक्ता से उस लिफाफे को मंगवाकर खोला। उसमें कलेक्टर ने हाईकोर्ट को संबोधित करते हुए व्यक्तिगत उपस्थिति माफी के लिए पत्र लिखा था। एकलपीठ ने इसे अक्षम्य आचरण करार दिया और कलेक्टर को शाम चार बजे उपस्थित होने का आदेश दिया। शाम चार बजे हुई सुनवाई में जज को बताया गया कि कलेक्टर जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर दुर्गम इलाके में हैं। उनसे संपर्क नहीं हो सका है। जज ने सरकार के आग्रह पर कलेक्टर सोनिया मीना की व्यक्तिगत उपस्थिति माफी स्वीकार कर ली, लेकिन उनके आचरण के लिए शासकीय वकील से स्पष्टीकरण मांगा।