मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
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प्रोविजनल डिग्री के लिए आवेदन करने पर मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी द्वारा स्पोर्ट्स, कल्चर, यूनिवर्सिटी डेवलपमेंट सहित अन्य मद की फीस डॉलर में मांगे जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि प्रोविजनल डिग्री की फीस के रूप में यूनिवर्सिटी मात्र 200 भारतीय रुपये ले रही है। जबकि अन्य मदों के लिए 4800 डॉलर मांगे जा रहे हैं। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
बता दें कि दानियाल शेख की तरफ से याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया था कि उसने एनआरआई कोटे के तहत प्रदेश में प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था। उसका एमबीबीएस कोर्स जुलाई 2021 में पूर्ण हो गया था और इंटर्नशिप अक्टूबर 2022 में पूरी हुई थी। वह नीट-पीजी की तैयारी कर रहा है। नीट पीजी आवेदन फॉर्म भरने में प्रोविजनल डिग्री अनिवार्य है। उसने मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी में प्रोविजनल डिग्री के लिए आवेदन किया था। प्रोविजनल डिग्री जारी नहीं होने पर उसने यूनिवर्सिटी में जाकर संपर्क किया। यूनिवर्सिटी ने पुस्तकालय शुल्क, विश्वविद्यालय विकास शुल्क, खेल व सांस्कृतिक शुल्क आदि के रूप में 4800 यूएस डॉलर सहित प्रोविजनल डिग्री के लिए दौ सौ भारतीय रुपये जमा करने को कहा।
याचिकाकर्ता की तरफ से पैरवी करते हुए अधिवक्ता आदित्य संघी ने युगलपीठ को बताया कि छात्र की डिग्री उसकी व्यक्तिगत संपत्ति है। विभिन्न मदों के नाम पर डिग्री के लिए 4800 डॉलर मांगे जा रहे हैं, जो लगभग 3 लाख 75 हजार भारतीय रुपये हैं। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने मेडिकल चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।