संभागायुक्त रीवा के आदेश पर जेल में निरुद्ध किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई है। याचिका में हिरासत को अवैध बताते हुए आदेश को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने सुनवाई करते हुए संभागायुक्त रीवा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
रीवा निवासी ओम प्रकाश गुप्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि उन पर पिछले दस वर्षों से मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त होने का आरोप लगाते हुए पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। याचिका के अनुसार, वर्ष 2025 से 2026 के बीच एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज चार अपराधों का उल्लेख किया गया था। इन मामलों में गांजे की मात्रा 80 ग्राम से पांच किलोग्राम के बीच बताई गई थी। दो मामलों में याचिकाकर्ता के पास से गांजा जब्त होने का उल्लेख था, जबकि अन्य दो मामलों में पकड़े गए आरोपियों के बयान के आधार पर उन्हें आरोपी बनाया गया था। याचिका में यह भी कहा गया कि उन्हें किसी भी मामले में न्यायालय से सजा नहीं हुई है।
याचिका के अनुसार, संभागायुक्त रीवा ने मामले की सुनवाई के बाद 5 अक्टूबर 2026 को पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत याचिकाकर्ता को भोपाल केंद्रीय जेल में निरुद्ध करने का आदेश जारी किया था। इसके बाद उन्हें केंद्रीय जेल भोपाल में निरुद्ध कर दिया गया।