शोभापुर पहाड़ी में बिना अनुमति खनन कर कॉलोनी निर्माण किए जाने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस पी के कौरव ने पाया कि सामान्य तथ्यों के साथ याचिकाकर्ता के भाई ने पूर्व में एनजीटी में याचिका दायर की थी। सामान्य तथ्यों के साथ दूसरे फोरम में याचिका दायर करने को गंभीरता से लेते हुए युगलपीठ ने कॉस्ट लगाते हुए उसे खारिज कर दिया, विस्तृत आदेश फिलहाल प्रतिक्षित है।
मप्र राज्य अधिवक्ता परिषद के वाइस चेयरमैन आरके सिंह सैनी की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि शोभापुर पहाड़ी पर नियम विरुद्ध तरीके से खनन किया जा रहा है। पहाड़ी पर लगे हरे-भरे पेड़ों और पहाड़ों को काटकर समतलीकरण किया जा रहा है, ताकि वहां पर कॉलोनी बनाई जा सके। याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया था कि टीएंडसी द्वारा जारी अनुमति में कहा गया था कि पहाड़ी में किसी प्रकार का खनन नहीं किया जाए। खनन करना है तो संबंधित विभाग से अनुमति प्राप्त कर उस संबंध में सूचित किया जाए।
याचिका में आरोप लगाते हुए कहा गया था कि संबंधित विभागों से बिना अनुमति हरी-भरी पहाड़ी को क्षतिग्रस्त किया जा रहा है। याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया था कि सामान्य तथ्यों के साथ एनजीटी में याचिकाकर्ता के भाई ने याचिका दायर की गई थी, जो खारिज हो गई थी। सिर्फ याचिकाकर्ता का नाम बदलकर सामान्य तथ्यों के साथ दो फोरम में याचिका दायर करने पर युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त की। युगलपीठ ने कॉस्ट के साथ याचिका को खारिज कर दिया।