मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के बावजूद भी लेमा गार्डन के प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों से अवैध कब्जा न हटने के मामले को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। चीफ जस्टिस रवि विजय मलिमथ व जस्टिस पुरुषेन्द्र कौरव की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए मंगलवार को जबलपुर कलेक्टर को नोटिस जारी कर पूछा कि अब तक अवैध कब्जे क्यों नहीं हटाए गए। युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद 22 मार्च को निर्धारित की है।
अवैध कब्जों के संबंध में जनहित याचिका पूर्व पार्षद मुरली दुबे की ओर से हाईकोर्ट में दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि जबलपुर के गोहलपुर के समीप लेमा गार्डन में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नगर निगम की निगरानी में 434 मकानों का निर्माण किया गया था। मकानों को गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले लोगों के लिए तैयार किया गया था। इनके आवंटन के लिये नगर निगम को 1160 आवेदन प्राप्त हुए थे, सभी ने मकान के लिए 40-40 हजार रुपये जमा किये थे, लेकिन इन हितग्राहियों को मकानों का आवंटन नहीं हुआ। आरोप है कि क्षेत्रीय पार्षद ताहिर अली ने आवासों में अपने लोगों को कब्जा करा लिया। वहीं, आवेदक का कहना है कि योजना के तहत निर्मित मकान सार्वजनिक संपत्ति हैं, ये सरकारी भूमि पर निर्मित हैं, जिस पर न्यायालय ने पूर्व में सभी को सुनवाई का मौका देते हुए विधि अनुसार अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिये थे। मंगलवार को हुई सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 22 मार्च को निर्धारित की है।