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Indore: मूर्तियां बनाने वाली कंपनी के कागजी होने की आशंका, चार-पांच लाख लागत की मूर्तियों का तिगुना भुगतान

Sat, 03 Jun 2023 05:36 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने कहा कि सात माह में मूर्तियों का बदरंग होना दर्शाता है कि घटिया निर्माण हुआ। मूर्तियों पर वेदरप्रुफ रंग का इस्तेमाल नहीं हुआ। उसकी घिसाई भी ठीक से नहीं हुई।
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कांग्रेस पदाधिकारियों की पत्रकावार्ता - फोटो : amar ujala digital
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विस्तार
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उज्जैन के महाकाल लोक में मूर्तियों के टूटने के बावजूद जिम्मेदार कंपनी को क्लीनचिट देने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने इंदौर में कहा कि सरकार कंपनी को बचाना चाहती है, इसलिए जांच नहीं कराई गई, जबकि मूर्तियां बनाने में घोटाला हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन मूर्तियों की लागत तीन से चार लाख रुपये तक है, उनके निर्माण का तिगुना भुगतान किया गया।

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पेटी कांट्रेक्टरों से कराया काम
मिश्रा ने आशंका जताई है कि मूर्तियां बनाने वाली गुजरात की एमपी बाबरिया कंपनी कागजी हो सकती है, क्योंकि मूर्तियां टूटने के बाद कंपनी का कोई प्रतिनिधि सामने नहीं आया। महाकाल लोक में मूर्तियों का काम पेटी कांट्रेक्टरों से कराया गया। मिश्रा ने कहा कि सिर्फ सात माह में मूर्तियों का बदरंग होना दर्शाता है कि घटिया निर्माण हुआ। मूर्तियों पर वेदरप्रुफ रंग का इस्तेमाल नहीं किया गया। उसकी घिसाई भी ठीक से नहीं हुई। जब मूर्तियों पर साधारण रंग का इस्तेमाल होता है, तभी वे बदरंग होती हैं। उन्होंने कहा कि ऊंचाई पर मूर्तियां लगाने के बावजूद उसके बेस को मजूबत करने के लिए ध्यान नहीं दिया गया।

कंपनी को फायदा पहुंचाया
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि अफसरों ने भी मूर्तियों की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं देकर कंपनी को फायदा पहुंचाया। अब इस मामले में कांग्रेस हाईकोर्ट में याचिका लगाएगी। उन्होंने कहा कि अफसर टेंडर शर्तों का हवाला देकर मूर्तियों की मरम्मत कराकर फिर उन्हें लगाने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि धर्मक्षेत्र में खंडित मूर्तियों का लगाकर हिंदू समाज की आस्था को चोट पहुंचाई जा रही है।
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दूसरी मूर्तियों को भी खतरा
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा महाकाल लोक की जांच के लिए गठित कमेटी के साथ महाकाल लोक गए मूर्तिकार सुंदर गुर्जर का कहना है कि महाकाल लोक की दूसरी मूर्तियां भी तेज हवा चलने पर गिर सकती है। खासकर रथ वाली मूर्ति का बेस भी कमजोर है। महाकाल लोक के उद्घाटन की जल्दबाजी में मूर्तियों की मजबूती पर ध्यान नहीं दिया गया। जिसका खामियाजा अब भुगतना पड़ रहा है।

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