जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर रक्षाबंधन का त्योहार अनूठे अंदाज में मनाया गया। शहरवासियों ने यहां पर पौधे लगाकर प्रकृति को राखी बांधी और पृथ्वी की सुरक्षा का संकल्प लिया। निदेशक डॉ. जनक पलटा मगिलिगन (जनक दीदी) ने बताया कि यह लगातार 38वां साल है जब हम सब इस तरह से राखी मना रहे हैं। जनक दीदी ने अपने राखी वाले भाई राजेंद्र ओचानी के साथ सनावदिया में अपने घर गिरिदर्शन के पीछे दुतनी पर्वत पर पौधारोपण किया। इस दौरान जनक दीदी ने बताया कि भारतीय त्योहार रक्षा बंधन पर बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है, जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है और भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वायदा करता है। इस दौरान उन्होंने लगातार 38 साल तक इस मौके पर पेड़ लगाने की कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत 1986 में उनके साथ एक सिन्धी भाई राजेंदर ओचानी ने की थी।
सूट और साड़ी नष्ट हो जाएंगे पर बहन को दिया वृक्ष का उपहार अमर रहेगा
दीदी ने बताया कि जब मुझसे राखी बांधने पर पूछा गया कि क्या उपहार चाहिए तो मैंने कहा कि सूट हो या साड़ी सब नष्ट हो जाएंगे लेकिन वृक्ष का उपहार हमेशा रहेगा। तब से राजेंदर और हम वृक्ष लगा रहे हैं। पहले बरली संस्थान 'बहाई भवन भमोरी' के प्रांगण में हमने मिलकर वृक्ष लगाया था तब से आज तक पेड़ लगाने का सिलसिला जारी है।
डाक्टर रावत ने दिए जूट वाले बैग
इस मौके पर डाक्टर भरत रावत ने जूट बैग अभियान वाले बैग दिए। इन पर लिखा हुआ है कि क्या आप आज मुस्कुराए और क्या आज आप किसी की मुस्कुराहट की वजह बने। इस मौके पर राजेंद्र ओचानी, राजेंद्र सिंह, राजेंद्र चौहान, जयश्री, कीर्ति सिक्का, दीपक रावलिया, एकलव्य, हेमंत, प्रशान, महेंद्र, अंश धाकड़, भरत भंडारी, धन्नू (महेश यादव), डॉ. भरत रावत, डॉ. काव्या रावत, डॉ. नीरजा पौराणिक, वीरेंद्र मेहरोत्रा, बालकृष्ण सोलंकी, सृष्टि, प्रणीत, अविनाश सेठी, विभा, सुनील चौहान, गोविंद माहेश्वरी, मनोज नागर, आदित्य, कृतिका मृदुल आदि शहर के कई गणमान्य नागरिक शरीक हुए।