मनुष्य का जीवन प्रकृति Nature की देन है और हम सही खान पान और रहन सहन के तरीकों से आजीवन स्वस्थ रह सकते हैं। वर्तमान में कई तरह की बीमारियों से लोग घिर रहे हैं लेकिन तमाम बीमारियों का इलाज भी प्रकृति की गोद में ही छुपा है। इन्हीं बातों को प्रयोगों के माध्यम से समझाने के लिए इंदौर के एक ग्रुप ने आओ चलो प्रकृति की ओर कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें प्राकृतिक चिकित्सा Naturopathy से बीमारियों को दूर करने का तरीका भी बताया गया।
मनुष्य अपनी आयु पूर्ण नहीं करता
कार्यक्रम के संयोजक डॉक्टर संजय लोंढे ने कहा कि मनुष्य ही पृथ्वी पर ऐसा प्राणी है जो अपनी ईश्वर प्रदत्त आयु को पूर्ण नहीं करता। क्योंकि केवल मनुष्य ही प्रकृति का निरंकुश दोहन कर, सतत प्रकृति के प्रतिकूल गतिविधियां करता है। वह कई तरह के प्रदूषण के रूप में जहर ले रहा है, गलत खानपान कर रहा है और बेहद अनियमित जीवनशैली को अपना रहा है। इन सब वजहों से वह खुद ही अपनी उम्र कम कर रहा है।
डॉक्टर संजय लोंढे ने कहा कि जितना हम प्रकृति के सामिप्य में रहेंगे उतना ही निरोगी-दीर्घायु जीवन पाएंगे। यही बात समझाने के लिए हमने एक दिवसीय प्राकृतिक चिकित्सा शिविर आयोजित किया है। इसमें शहर के डॉक्टर, व्यापारियों और रिटायर्ड अधिकारियों समेत बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया।
कई तरह की प्राकृतिक क्रियाएं करवाई गई
सभी को एक दिवसीय शिविर में जल नेति, श्वास क्रियाएं, सरसों की मालिश, पेडू पर मिट्टी की पट्टी, पेडू पर गर्म ठंडा सेंक, कंबल लपेट, पेडू लपेट, साफा लपेट, घर्षण स्नान, तेल मालिश, कपिंग थेरेपी, मिट्टी स्नान, आई वाश, सौम्य जल से स्नान के अभ्यास कराए गए। अन्य सत्रों में मनोरंजक किस्से कहानी, क्विज और अनुभव शेयर करने के भी आयोजन रखे गए। कार्यक्रम के संयोजक संजय चराटे, डा अंतिम जैन थे। मधुसूदन सोमानी, पवन जैन मुख्य प्रशिक्षक थे। वृंदा खांडवे, संजय माहेश्वरी ने मिलेट आहार पर चर्चा की। रामदास पटेल, अजय मकवाना, तेजस्विनी आर्य, जयदीप मराठे, सरिता सेंगर, कपिल जोशी ने विभिन्न सत्रों में अभ्यास करवाए।