मालवा निमाड़ से भाजपा के 48 विधायक विधानसभा में पहुंचे है। उनमें से ज्यादातर दो से तीन बार लगातार विधायक रह चुके है। वे मंत्री बनने की इच्छा भी रख रहे है, लेकिन अब उन्हें इसके लिए ज्यादा जोर लगाना होगा,क्योकि मालवा के उज्जैन संभाग से मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री बनाए जा चुके है।
भाजपा ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर हर संसदीय क्षेत्र से एक मंत्री बनाने की रणनीति तैयार की है, लेकिन उज्जैन और मंदसौर संसदीय क्षेत्र से अब दूसरे विधायक शायद ही मंत्री पद पा सकेंगे,क्योकि मुख्यमंत्री मोहन यादव और उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते है।
पिछली सरकार में थे दस मंत्री
मालवा निमाड़ से पिछली सरकार में दस मंत्री थे। इस चुनाव में दो मंत्री चुनाव हार गए। इस बार भी मंत्री पद के लिए विजय शाह, अर्चना चिटनीस, बालकृष्ण पाटीदार, राजकुमार मेव, नागर सिंह चौहान, उषा ठाकुर, नीना वर्मा, अेामप्रकाश सखलेचा, चैतन्य कश्यप, हरदीप सिंह डंग विधायकों का दावा मंत्री पद के लिए मजबूत माना जा रहा है।
क्षेत्रीय समीकरणों के हिसाब से इंदौर संभाग के इंदौर, खरगोन, खंडवा, धार, उज्जैन संभाग के देवास, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम संसदीय क्षेत्र से एक विधायक को मंत्री बनने का मौका मिल सकता है।
मेंदौला का दावा मजबूत
प्रदेश में सबसे ज्यादा अंतर से चुनाव जीते इंदौर के विधायक रमेश मेंदौला का मंत्री पद का दावा अब मजबूत माना जा रहा है। यदि कैलाश विजयवर्गीय मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री बनते तो फिर मेंदौला का नंबर नहीं लगता, लेकिन विजयवर्गीय नहीं बन सके।
माना जा रहा है कि अब मंत्रीमंडल में भी विजयवर्गीय शायद ही रहे,क्योकि वे मोहन यादव से काफी वरिष्ठ है। इस स्थिति में विधायक मेंदौला इंदौर संसदीय क्षेत्र से मंत्रीपद के मजबूत दावेदार होंगे। वे लगातार चौथी बार विधायक है। इंदौर प्रदेश का सबसे बड़ा शहर है। इस कारण यहां से दो मंत्री भी हो सकते है। इंदौर से मंत्री बनने के लिए तुलसी सिलावट, उषा ठाकुर, महेंद्र हार्डिया भी जोर लगा सकते है।