मध्यप्रदेश का क्षेत्र जो मैग्नीज नगरी के नाम से भी जाना जाता है, उसका राजनीतिक इतिहास भी खास है। आदिवासी और जनजाति बाहुल वाले बालाघाट की खनिज, वन से भरपूर आच्छादित क्षेत्र के रूप में अलग ही पहचान है। बालाघाट की सीमा महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के संपर्क में हैं। मध्यप्रदेश का बालाघाट लाल गलियारा (नक्सल प्रभावित क्षेत्र) का हिस्सा है, जो हमेशा चर्चा में रहता है।
पिछले 2023 प्रदेश के विधानसभा चुनाव में बालाघाट लोकसभा के 8 क्षेत्रों में से चार कांग्रेस और चार भाजपा को प्राप्त हुए थे। लोकसभा क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस को प्राप्त मतों में कांग्रेस के उम्मीदवार 56697 मतों की और भाजपा के उम्मीदवारों ने 60203 मतों की बढ़त ली थी। इस तरह यदि लोकसभा क्षेत्र के अनुसार देखें तो भाजपा की 3533 मत अधिक प्राप्त हुए हैं। जाहिर है विधानसभा चुनाव में बालाघाट के लोकसभा क्षेत्र में भाजपा का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा है। लोकसभा और विधानसभा की वोट देने की प्रकृति मतदाता की कुछ अलग रही है। 1998 से क्षेत्र के लोकसभा चुनाव में भाजपा का उम्मीदवार विजय होता रहा है।
अन्य दलों को भी मिला मौका
बालाघाट में 1962 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के भोलाराम राम जी चुने गए थे। प्रजा सोशलिस्ट पार्टी का गठन जयप्रकाश नारायण ने 1952 में किया था। 1972 तक यह पार्टी अस्तित्व में रही, बाद में इसका अन्य दल में विलय हो गया था। 1977 में रिपब्लिक पार्टी इंडिया खोबरागडे दल का गठन भाऊ राव खोबरागडे के नाम पर किया गया था। इस दल का भी यहां प्रभाव रहा। 1977 के चुनाव में जब देश में भारतीय लोकदल जनता पार्टी की आंधी चल रही थी, उस वक्त यहां से रिपब्लिक पार्टी इंडिया खोबरागडे के कचरमल जैन विजय रहे थे।
हस्तियों से मिलते-जुलते नाम
बालाघाट लोकसभा निर्वाचन में 1957 से चुनावी मैदान में खड़े हुए उम्मीदवारों के नाम में राम जरूर रहे हैं। जैसे भोलाराम राम जी, शंकरलाल राजाराम, फदलराम, रघुनाथ, रामचरण, श्योराम और दयाराम नाम के उम्मीदवार खड़े हुए। प्रख्यात लेखक मुल्कराज आनंद अंग्रेजी साहित्य के चिंतक और विचारक थे। आपने कई किताबों का लेखन किया। भारत सरकार ने पद्मभूषण से सम्मानित किया था। एक संयोग रहा है कि 1998 में बालाघाट से एक निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में था, जिनका नाम मुल्कराज आनंद था। इस निर्दलीय उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई थी। अभिनेता महिपाल के नाम का प्रत्याशी भी चुनाव लड़ चुका है। 1999 के लोकसभा चुनाव में क्षेत्र से एक निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे उनका नाम महिपाल था। इन महिपाल का फिल्मों से कोई वास्ता नहीं था।
कंकर मुंजारे कई पार्टियों से रहे उम्मीदवार
बालाघाट में 1989 में निर्दलीय उम्मीदवार और क्षेत्र के कद्दावर नेता कंकर मुंजारे विजय रहे थे। इससे पूर्व कंकर मुंजारे 1984 में निर्दलीय चुनाव में खड़े हुए थे। 1991 में जनता दल, 1996 में क्रान्तिकारी समाजवादी दल, 1998 में समता पार्टी, 1999 में सिवनी लोकसभा से जनता पार्टी, 2004 जनता पार्टी, 2009 में राष्ट्रीय जनता दल और 2019 में बहुजन समाज पार्टी से बालाघाट लोकसभा से चुनाव लड़ चुके हैं। इस बार 2024 लोकसभा चुनाव में कंकर मुंजारे बसपा के उम्मीदवार के रूप में अपना भाग्य आजमा रहे हैं। कंकर मुंजारे की पत्नी अनुभा मुंजारे 2014 में बालाघाट से सपा से लोकसभा चुनाव लड़ चुकी हैं। वर्तमान में अनुभा मुंजारे बालाघाट से कांग्रेस की विधायक हैं और क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार का प्रचार कर रही हैं।
बालाघाट लोकसभा चुनाव 2024 में 13 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस से अशोक सिंह सरस्वर, बसपा से कंकर मुंजारे और भाजपा से भारती पारधी मुख्य उम्मीदवार हैं। पूर्व सांसद ढालसिंह बिसेन को इस बार टिकट नहीं दिया है। भारती पारधी महिला मोर्चा से जुड़ी हैं और पार्षद हैं। उन्हें सीधे लोकसभा का टिकट मिला है। वे अच्छी वक्ता हैं और उनके ससुर भोलाराम पारधी 1962 में क्षेत्र के सांसद रहे हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के ढालसिंह बिसेन 2 लाख 42 हज़ार 66 मतों से विजय रहे थे।
रोचक जानकारी
* क्षेत्र में 7 बार कांग्रेस और 6 बार भाजपा शेष अन्य 3 उम्मीदवार विजय रहे हैं।
* सबसे कम मतों से विजय 1996 में कांग्रेस उम्मीदवार विश्वेश्वर भगत की 1257 मतों से और सबसे बड़ी विजय भाजपा के 2019 में ढालसिंह बिसेन की 242066 मतों से रही थी।
* सबसे कम उम्मीदवार वर्ष 1957 और 1962 में चार थे, सर्वाधिक उम्मीदवार वर्ष 1996 और 2019 में 23 थे।
* क्षेत्र में सबसे न्यूनतम मतदान वर्ष 1962 में 45.18 प्रतिशत और सर्वाधिक मतदान वर्ष 2019 में 77.61 प्रतिशत रहा था।
* 1999 में भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रह्लाद पटेल बालाघाट से विजय रहे थे।
* नंदकिशोर शर्मा और विश्वेश्वर भगत दोनों कांग्रेस की उम्मीदवारों के लगातार दो -दो बार विजय होने का रिकॉर्ड है।