जावरा मध्य भारत की रियासत रहा है। इंदौर के होल्कर स्टेट में कई संगीतकार मुख्यत: सारंगी वादक जावरा रियासत के थे। जावरा मालवा का अंचल की एक प्रमुख सीट रही है, इसका मध्य प्रदेश की राजनीति में भी दिलचस्प इतिहास रहा है। जावरा विधानसभा क्षेत्र प्रदेश के तीसरे मुख्यमंत्री रहे डॉ. कैलाश नाथ काटजू का निर्वाचन क्षेत्र रहा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण पदों पर रहे काटजू को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने मध्य प्रदेश की कमान सौंपी थी। 1957 में हुए पहले चुनाव में काटजू ने तत्कालीन जनसंघ अब भाजपा के लक्ष्मीनारायण पांडेय को 6,795 मतों से पराजित किया था और प्रदेश के मुख्यमंत्री का पदभार संभाला था।
1962 में 1500 वोटों से हार गए थे काटजू
इसके बाद 1962 का चुनाव कांग्रेस ने कैलाश नाथ काटजू के नेतृत्व में लड़ा और वे अपनी परंपरागत सीट जावरा से खड़े हुए। उनका मुकाबला फिर जनसंघ के कद्दावर नेता लक्ष्मीनारायण पांडेय से हुआ था। जावरा में कुछ कांग्रेसी काटजू को नेहरूजी द्वारा तवज्जो दिए जाने से नाराज थे। आखिर जिसका भय था वही हुआ और डॉ काटजू 1500 मतों से हार गए। प्रदेश में कांग्रेस को विजय मिली पर मुख्य नेतृत्वकर्ता पराजित हो गए। पंडित नेहरू काटजू की पराजय से काफी नाराज हुए।
अटलजी के नजदीकी थे लक्ष्मीनारायण पांडेय
इसके बाद 1972 के चुनाव में लक्ष्मीनारायण पांडेय कांग्रेस के बंकटलाल से पराजित हो गए। पांडेय जनसंघ के मजबूत पकड़ वाले नेता थे और अटलबिहारी वाजपेयी के नजदीकी थे। उन्होंने पांचवीं लोकसभा के चुनाव में बालकवि बैरागी को पराजित कर प्रदेश की राजनीति से केंद्र की और रुख कर लिया और वे 1972 एवं 1977 फिर 1989 से 2014 तक लगातार मंदसौर से सांसद चुने जाते रहे।
कभी राजेंद्र पांडेय तो कभी कालूखेड़ा जीते
1977 से 1993 तक जावरा विधानसभा सीट पर कभी कांग्रेस को कभी भाजपा को विजय हासिल होती रही। 1998 में महेंद्रसिंह कालूखेड़ा के सामने पुनः पांडेय बंधु का आगमन हुआ और लक्ष्मीनारायण पांडेय के पुत्र राजेंद्र पांडेय भाजपा के उम्मीदवार थे। पांडेय चुनाव हार गए। हालांकि, 2003 के चुनाव में राजेंद्र पांडेय विजयी हो गए और उन्होंने महेंद्र सिंह कालूखेड़ा को पराजित किया। 2008 में फिर कालूखेड़ा विजयी हुए और राजेंद्र पांडेय हार गए इस तरह शह और मात का खेल चलता रहा।
2013 व 2018 में जीते पांडेय इस बार फिर मैदान में
2018 के चुनाव में कांग्रेस के बागी हमीर सिंह राठौर और भाजपा से बागी श्यामबिहारी पटेल चुनाव मैदान में निर्दलीय उम्मीदवार थे उन्हें क्रमशः 16,593 और 23,672 मत मिले। दोनों बागियों ने अपने दलों के वोट काटे वही भाजपा के श्यामबिहारी पटेल ने राजेंद्र पांडेय की जीत को सीमित कर 511 पर सिमटा दिया। 2013 और 2018 में राजेंद्र पांडेय विजयी हुए। इस बार पुनः पांडेय को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया है, वहीं कांग्रेस की ओर से हिम्मत श्रीमाल को उम्मीदवार बनाया गया है। हालांकि श्रीमाल का विरोध हो रहा है। देखना है इस बार जावरा की बाजी किसके हाथ लगती है।
रोचक जानकारी
- लगातार दो बार विजयी होने का रिकॉर्ड कांग्रेस के उम्मीदवार का रहा था पर 2008 और 2013 में भाजपा के राजेंद्र पांडेय ने ये मिथक तोड दिया।
- सबसे बड़ी और और सबसे छोटी विजय का रिकॉर्ड राजेंद्र पांडेय का रहा। 2013 में वे 29,851 मतों से विजयी हुए और 2018 में मात्र 511 मतों से विजय रहे।
- 2018 में 84. 21 प्रतिशत मतदान एक रिकॉर्ड मतदान जावरा में हुआ जो अभी तक का सर्वाधिक मतदान का रिकॉर्ड रहा है।