भोपाल के पोस्टरों में शिवराज नदारद
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इंदौर की एक सभा में कैैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि वे विधायक बनने नहीं आए है,सरकार में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी। भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिल चुका है और विजयवर्गीय खेमे ने ‘बड़ी जिम्मेदारी’ के लिए लाबिंग शुरू कर दी है। विजयवर्गीय के खास समर्थक विधायक रमेश मेंदौला ने विजयवर्गीय को मुख्यमंत्री बनाने की मांग के साथ माहौल बनाना शुरू कर दिया,उधर भोपाल में विजयवर्गीय समर्थक द्वारा लगाए गए होर्डिंगों से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का चेहरा गायब कर दिया।
इंदौर के एक नंबर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतने के बाद विजयवर्गीय के दिल्ली में सक्रिय होना भी यह संकेत दे रहा है कि वे मुख्यमंत्री बनने की रेस में सबसे आगे रहना चाहते है। इस रेस मेें उनके साथ नरेंद्र सिंह तोमर और प्रहलाद पटेल भी है।
मुख्यमंत्री बनने की इच्छा विजयवर्गीय की काफी पुरानी है। जब उमाभारती ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा से दिया था और शीर्ष नेतृत्व प्रदेश में सीएम का चेहरा खोज रहा था। तब विजयवर्गीय ने कोशिश की थी,लेकिन तब उनका राजनीतिक कद इतना बड़ा नहीं था। बाद में बाबूलाल गौर को मुख्यमंत्री बनाया गया।
18 साल बाद एक बार फिर वे मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं खोज रहे है। अगले साल लोकसभा चुनाव तक लगता नहीं कि शीष नेतृत्व बदलाव करे,लेकिन विजयवर्गीय शीर्ष नेतृत्व तक अपने बयानों से भी अपनी मंशा पहुंचा रहे है। शिवराज लाड़ली बहना योजना को गेम चेेंजर साबित करने में तुले है। विजयवर्गीय ने जीतने के बाद ही उस योजना के बजाए मोदी के शीर्ष नेतृत्व और गृहमंत्री अमित शाह की कुशल रणनीति को श्रेय देना शुरू कर दिया है। उनके बदले तेवर की प्रदेश की राजनीति में बड़ी चर्चा है।