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Indore: संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा-संघ लाठी प्रदर्शन के नहीं सिखाता, इससे वीरता आती है

Fri, 03 Jan 2025 07:22 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि संघ के कार्यक्रम प्रदर्शन के लिए नहीं होते। उनसे जुड़कर मनुष्य की संस्कृति, स्वभाव और संस्कार बनते है। भागवत ने कहा कि आयोजन मेें इस जयघोष का प्रदर्शन इसलिए किया गया कि समाज इस जयघोष की जड़ को देखे।
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संघ प्रमुख मोहन भागवत जयघोष कार्यक्रम में हुए शामिल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शताब्दी वर्ष की शुरुआत इंदौर में स्वर शतकम् आयोजन से हुई। एक हजार से ज्याद स्वयंसेवकों ने जयघोष की प्रस्तुति दी। स्वयंसेवकों ने सौ के अंक की मानव आकृति भी बनाई।

समारोह में संघ प्रमुख मोहन भागवत भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि संघ के कार्यक्रमों से मनुष्य के सद्गुणों में वृद्धि होती है। संघ लाठी चलाना प्रदर्शन के लिए नहीं सिखाता। यह एक कला है और लाठी चलाने से व्यक्ति को वीरता आती है। डर का भाव खत्म हो जाता है।

आरएसएस में घोष दलों के महत्व को बताते हुए उन्होंने कहा कि संगीत के सब अनुरागी है, लेकिन साधक सब नहीं होते। भारतीय संगीत में घोष दलों की परंपरा नहीं थी। शुरुआत में संघ के स्वयंसेवकों ने नागपुर के कामठी केंटोनमेंट बोर्ड में सेना के वादकों की धुनें सुनकर अभ्यास किया। संगीत वादन भी देशभक्ति से जुड़ा है। दूसरे देशों में देशभक्ति संगीत से भी प्रदर्शित होती है। हम दुनिया में किसी से पीछे न रहे,हमने भी घोष की उपयोगिता को समझा इसलिए संघ ने भी घोष दल बनाए।

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संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि संघ के कार्यक्रम प्रदर्शन के लिए नहीं होते। उनसे जुड़कर मनुष्य की संस्कृति, स्वभाव और संस्कार बनते है। भागवत ने कहा कि आयोजन मेें इस जयघोष का प्रदर्शन इसलिए किया गया कि समाज इस जयघोष की जड़ को देखे। राष्ट्र निर्माण के लिए लोग संघ से जुड़े। लोगों में राष्ट्र निर्माण का भाव जागृत होगा तो एक दिन सारी दुनिया सुख और शांति का युग देखेगी।
 

समारोह के मुख्य अतिथि लोक गीत कलाकार कालूराम बामनिया ने कहा कि कर्म की प्रधानता है। हमें कर्म करना चाहिए। कर्म से मनुष्य महान बनता है।मंच पर मालवा प्रांत के सर संघ चालक प्रकाश शास्त्री, डॉ मुकेश मोड़ भी मंच पर मौजूद थे।

45 मिनिट तक घोष दल ने दी अलग-अलग धुनों की प्रस्तुति

मालवा प्रांत के 28 जिलों के स्वयंसेवकों ने बैंड,बांसुरी, ट्रंपेट पर अलग अलग धुनें बजाई। बांसुरी पर भजन मेरी झोपडी के भाग खुल जाएंगे,राम आएंगे,नमःशिवाय भजन की धुन भी बजाई गई। 45 मिनिट तक धुनों की प्रस्तुति के बाद वक्ताओं ने संबोधित किया।

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