इंदौर में दो साल पहले अच्छे उद्देश्य के साथ नाइट कल्चर शुरू हुआ था, ताकि रात को संचालित होने वाली आईटी कंपनी, काॅल सेंटरों के कर्मचारियों को नाश्ते, चाय व गपशप करने की सुविधा मिल सके, लेकिन नाइट कल्चर की आड़ में इंदौर मेें नशा कल्चर शुरू हो गया था। इसे रोक पाने में पुलिस नाकाम रही और नाइट कल्चर इंदौर में बंद हो गया।
नाइट कल्चर पर रोक लगते ही कुक, वेटरों की नौकरी खतरे में
बीआरटीएस दो सालों मेें 20 से ज्यादा नए रेस्त्रां खुल गए थे, जो देर रात तक चलते थे। कई रेस्टोरेेंटों में तीन शिफ्टों मेें काम होने लगा था, लेकिन नाइट कल्चर बंद होने के बाद कई कुक और वेटरों की नौकरी खतरे में पड़ गई है।
रेस्त्रा संचालक हेंमत बड़कुल कहते है कि बदनामी पब कल्चर के कारण होती रही। रेस्त्रां में तो देर रात तक जाॅब करने वाले, पढ़ाई करने वाले छात्र आते थे। रात की शिफ्ट के लिए मैने अलग से स्टाॅफ रखा था। जिसे अब हटाना पड़ेगा।