भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा उपाध्यक्ष नासिर शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह को मानहानि का लीगल नोटिस भेजा है। मामला वक्फ बोर्ड की जमीन पर फेसबुक पोस्ट करने का है।
कैसे शुरू हुआ विवाद
दिग्विजय सिंह ने 12 अगस्त को वक्फ बोर्ड की जमीन पर कब्जा करने के आरोपों की जांच के लिए लेटर लिखा। उन्होंने केन्द्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री और केन्द्रीय वक्फ परिषद के अध्यक्ष किरेन रिजिजू को लेटर लिखकर कहा कि जिला वक्फ कमेटी इंदौर के सचिव साजिद रोयल का शिकायती पत्र इसमें संलग्न है। उन्होंने इंदौर बाइपास स्थित कोकिला बेन हॉस्पिटल और एडवांस एकेडमी से लगी मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की 100 करोड़ रुपए की बेशकीमती जमीन पर नासिर शाह और अन्य के द्वारा बाउंडरी वॉल बना कर कब्जा करने की शिकायत की है। जमीन का केस उच्च न्यायालय में चल रहा है। कोर्ट ने स्टे देते हुए स्थिति यथावत रखने के आदेश दिए हैं। स्टे के बावजूद नासिर शाह और अन्य द्वारा अतिक्रमण किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा हो रही है। मामले में निर्माण रोकने और कोर्ट की अवहेलना करने पर इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। मामले में बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चे के एक पदाधिकारी द्वारा भी हस्तक्षेप कर दबाव बनाया जा रहा है। एक तरफ केंद्र सरकार वक्फ प्रॉपर्टी प्रबंधन को लेकर संसद में बिल ला रही है, वहीं उनके समर्थक कब्जा करने वालों को संरक्षण दे रहे हैं। शिकायत की वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी से जांच करवाई जाए। यह लेटर लिखने के बाद उन्होंने इसे फेसबुक आईडी पर भी पोस्ट कर दिया। लसूड़िया थाने में 10 अगस्त को कमेटी सचिव ने आवेदन दिया है और नासिर शाह के द्वारा किए जा रहे कब्जे को रोकने का निवेदन भी किया है। दिग्विजय सिंह ने लेटर में इसकी भी जानकारी दी है।
दस करोड़ नहीं दिए तो कोर्ट केस होगा
अब नासिर शाह का कहना है कि पूरे मामले को दिग्विजय सिंह ने जांच से पहले सार्वजनिक किया और सोशल मीडिया पर नाम भी पोस्ट कर दिए। इसलिए मानहानि का लीगल नोटिस दिया गया है। नोटिस में तीन दिन के अंदर अखबारों में खेद प्रकाशित करवाने की बात भी कही है। इसके साथ दस करोड़ रुपए मानहानि के एवज में देने के लिए कहा है। यह भी कहा है कि ऐसा नहीं किया गया तो कोर्ट केस किया जाएगा।