मध्य प्रदेश की 29 सीटों पर कांग्रेस इस बार जोरदार टक्कर देती दिखाई नहीं दे रही है, लेकिन कांग्रेस का फोकस प्रदेश की छह आदिवासी सीटों पर है। इन सीटों पर कांग्रेस ने प्रत्याशी भी सोच विचार कर उतारे है और बड़े नेता भी इन सीटों पर ही ज्यादा प्रचार करने जाएंगे।
राहुल गांधी ने भी मध्य प्रदेश में अपने चुनावी अभियान का श्रीगणेश आदिवासी बहुल्य शहडोल से किया।उनकी एक सभा धार व झाबुआ क्षेत्र में भी हो सकती है,क्योकि पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मालवा निमाड़ में भाजपा से ज्यादा आदिवासी सीटें मिली थी। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने प्रदेश की छह आदिवासी सीटें जीती थी।
कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि एंटी इंकमबैैंसी फेक्टर आदिवासी सीटों पर काम कर सकता हैै और कांग्रेस को इस कारण फायदा हो सकता है। भाजपा ने भी टिकट चयन के समय आदिवासी सीटों पर विशेष ध्या दिया। यहीं कारण है कि धार और रतलाम झाबुआ सीट पर भाजपा ने उम्मीदवार भी बदले।
भाजपा ने मध्य प्रदेश मेें 29 सीटों पर जीत दर्ज कराने का टारगेट रखा है। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के पास सिर्फ छिंदवाड़ा लोकसभा सीट थी। तब दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे दिग्गज नेता भी चुनाव हार गए थे। कांग्रेस इस चुनाव में अनुसूचित जनजाति बाहुल्य धार, खरगोन, रतलाम-झाबुआ, शहडोल,मंडला और बैतूल लोकसभा सीट पर ज्यादा ध्यान दे रही है।डेढ़ माह पहले राहुल गांधी ने न्याय यात्रा के दौरान झाबुआ और धार लोकसभा सीटों के सभाएं ली थीं।
खासकर धार, रतलाम झाबुआ और खरगोन सीट पर स्थानीय कांग्रेस नेतागणों को ज्यादा ध्यान देने के लिए कहा गया है। रतलाम-झाबुआ सीट पर कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया को मैदान में उतारा है। वहीं धार और खरगोन लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने नए चेहरों पर दांव लगाया है। इन सीटों पर कांग्रेस जयस के वोटबैैंक को भी मददगार मान रही है,क्योकि विधानसभा चुनाव में धार और खरगोन जिले की दो सीटों पर जयस से जुड़े नेता कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे।