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Indore News: आठ माह मेें तैयार हो जाएगा 200 जान ले चुके गणपति घाट का बायपास, डेढ़ साल पहले मिली थी मंजूरी

Sun, 21 Apr 2024 07:11 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

पहाड़ी हिस्सा होने के कारण सड़क के लिए पहाड़ के कुछ हिस्से भी काटे जा रहे है। इस कारण निर्माण में समय लग रहा है। एनएचएआई अफसरों का कहना है कि आठ माह के भीतर बायपास पर ट्रैफिक शुरू हो जाएगा। 
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पहाड़ों के बीच से बनाया जा रहा नया बायपास। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुबंई- आगर नेशनल हाइवे के सबसे बड़े ब्लैक स्पाॅट गणपति घाट पर अब हादसे नहीं होंगे। एनएचएआई ने इस घाट का बायपास तैयार कर लिया है, जो आठ किलोमीटर लंबा है। बायपास का बेस वर्क तैयार हो चुका है। आठ माह में सड़क बनकर तैयार हो जाएगी। इंदौर से सेंधवा की तरफ जाने वाले वाहन बायपास से होकर जा सकेंगे, जबकि सेंधवा से इंदौर के लिए घाट सेक्शन वाले मार्ग का ही उपयोग होगा।

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धामनोद जिले में आने वाले इस घाट पर अक्सर हादसे होते हैं। 15 सालों में घाट के चार किलोमीटर हिस्से में 200 से ज्यादा लोग हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं। इस ब्लैैक स्पाॅट को खत्म करने के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बायपास निर्माण की मंजूरी डेढ़ साल पहले दी थी। मंजूरी के बाद छह माह वन विभाग की अनुमति में बीत गए। उसके बाद निर्माण शुरू हुआ है।

पहाड़ी हिस्सा होने के कारण सड़क के लिए पहाड़ के कुछ हिस्से भी काटे जा रहे हैं। इस कारण निर्माण में समय लग रहा है। एनएचएआई अफसरों का कहना है कि आठ माह के भीतर बायपास पर ट्रैफिक शुरू हो जाएगा। नया बायपास नीमगढ़ से ढाल गांव के बीच 9 किलोमीटर लंबाई में बन रहा है। बायपास की चौड़ाई 30 मीटर है। बायपास के लिए एनएचएआई ने 33 हेक्टेयर जमीन अधिगृहित की है। इस प्रोजेक्ट पर 200 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।
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तेज ढलान के कारण हो जाते हैं वाहनों के ब्रेक फेल
गणपति घाट के चार किलोमीटर हिस्से में 15 सालों मेें 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। घाट के इस हिस्से का ढलान ज्यादा है। घाट पर बंद गाड़ी की स्पीड भी ढलान के कारण 70 तक पहुंच जाती है। ज्यादातर फर्शियों व पत्थरों से भरे वाहन यहां दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं। ढलान के कारण फर्शियों का भार भी केबिन की तरफ जा आता है और स्पीड कंट्रोल करने के लिए ड्रायवर लगातर ब्रेक लगाते हैं। इससे ब्रेक फेल हो जाते हैं और भारी वाहन सड़क पर चल रहे दूसरे वाहनों को चपेट मेें ले लेते हैं।

घाट पर सबसे ज्यादा हादसे वर्ष 2018 में हुए। उस साल 65 हादसों में 35 लोगों ने जान गंवाई थी और 99 लोग घायल हुए थे। 2017 में भी 29 मौतें घाट पर हुई थीं। बायपास निर्माण अवधि के दौरान भी गणपति घाट पर चार हादसे हो चुके हैं।

पहाड़ों को काट कर बनाया था घाट
15 साल पहले राऊ खलघाट फोरलेन के निर्माण के समय गणपति घाट पहाड़ों को काटकर बनाया गया था। तब तय नियमों के अनुसार रोड का ढलान तय किया गया था और उसकी डिजाइन के हिसाब से सड़क बनाई गई। पाथ कम्पनी को ठेका दिया गया था, लेकिन सड़क बनने के साल भर बाद ही हादसे होने लगे। हादसों को लेकर कंपनी का कहना है कि दिनभर में हजारों वाहन घाट से निकलते है। जिन वाहनों का फिटनेस नहीं होता है। उनके हादसे का खतरा ज्यादा रहता है। कई बार डीजल बचाने के लिए चालक वाहन बंद कर घाट पर गाड़ी चलाते है। उससे भी ब्रेक फेल होने का अंदेशा रहता है।

घर्षण से जल जाते हैं वाहन
घाट पर ज्यादा मौतें वाहनों के जलने से हुई है। दरअसल ब्रेक फेल होने से वाहन दूसरे वाहनों से टकराते हैं और उन्हें घसीटते हुए ले जाते हैं। इससे वाहन में घर्षण के कारण आग लग जाती है और वाहन में फंसे लोगों की जलने से मौत हो जाती है।

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