वन विभाग के घटिया पिंजरों की पोल महू में एक तेंदुए ने खोल दी। उसे पकड़ने के लिए वन अफसरों ने आर्मी वार काॅलेज परिसर में रखे पिंजरे में बकरा बांध रखा था, ताकि तेंदुआ उसे खाने आए और पिंजरे में कैद हो जाए। तेंदुआ पिंजरे में आया और बकरे को खा गया। इसके बाद उसने पिंजरा तोड़ा तो भाग गया। सुबह वन विभाग के अफसर मौके पर पहुंचे थे तो न पिंजरे में बकरा था और न तेंदुआ।
पिंजरा तोड़कर भागे तेंदुए की घटना से वन विभाग की व्यवस्था पर सवाल खड़े होने हो रहे है और इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। जिसमे यह पता चला कि परिसर में लगाए गया पिंजरा दस साल से भी ज्यादा पुराना है और जालियों पर जंग लग चुका है। वेल्डिंग भी कमजोर हो गई। कर्मचारियों ने पिंजरों की मरम्मत की तरफ भी ध्यान नहीं दिया। इसका फायदा तेंदुए ने उठाया।
आर्मी वार कालेज में महीनेभर पहले तेंदुए नजर आया था। दो से तीन बार तेंदुआ सीसीटीवी कैमरे में कैद भी हुआ,लेकिन पकड़ में नहीं आ रहा है। सेना और वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने कुछ दिन पहले तेंदुए की खोजबीन भी की, लेकिन तेंदुए को पकड़ा नहीं जा सका।
अफसरों ने इसके बाद परिसर में जगह-जगह पिंजरे लगाए थे। दो बारा तेंदुए को पिंजरे के करीब भी आते देखा गया, लेकिन वह बकरे का शिकार करने पिंजरे के भीतर नहीं गया, लेकिन रविवार को तेंदुआ पिंजरे में रखे बकरे का शिकार करने आया। जैसे ही तेंदुआ पिंजरे में घुसा, उसका गेट बंद हो गया।
तेंदुए ने पहले बकरा खाया और फिर पिंजरे के जाली वाले हिस्से को तोड़ने में सफल रहा। वह पिंजरे की कैद से आजाद होकर जंगल की तरफ भाग गया। डीएफओ एमएस सोलंकी ने बताया कि पिंजरे काफी पुराने हो चुके है। तीन नए पिंजरे खरीदें जाएंगे। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। इंदौर वन मंडल की टीम इंदौर संभाग के आठ जिलों में वन्य प्राणियों का रेस्क्यू करने जाती है और उन्हें वाहनों में पिंजरें भी ले जाना पड़ते है। परिवहन के कारण भी पिंजरे कमजोर हो चुके है।