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Indore News: बावड़ी हादसे में हाईकोर्ट ने कलेक्टर और निगम कमिश्नर को नोटिस जारी किया

Tue, 18 Apr 2023 08:22 PM IST
अर्जुन रिछारिया न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

कोर्ट ने पूछा है कि इतने बड़े हादसे के जिम्मेदारों पर अब तक कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? जो अधिकारी हादसे के लिए जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज क्यों नहीं करवाया गया?
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इंदौर बावड़ी हादसा - फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
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इंदौर में हुए बावड़ी हादसे को लेकर हाई कोर्ट में प्रस्तुत चौथी जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर में हुए इस हादसे पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्क सुनने के बाद कलेक्टर डा. इलैया राजा टी और निगमायुक्त हर्षिका सिंह को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने पूछा है कि इतने बड़े हादसे के जिम्मेदारों पर अब तक कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? जो अधिकारी हादसे के लिए जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज क्यों नहीं करवाया गया? कलेक्टर और निगमायुक्त को इस पर चार सप्ताह में जवाब देना है। अगली सुनवाई जून के दूसरे सप्ताह में होगी।
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चार जनहित याचिकाएं लगी
इस मामले में हाई कोर्ट में चार जनहित याचिकाएं प्रस्तुत हुई हैं। मंगलवार को जिस जनहित याचिका में सुनवाई हुई उसे पूर्व पार्षद दिलीप कौशल ने वरिष्ठ अधिवक्ता डा. मनोहरलाल दलाल और लोकेंद्र जोशी के माध्यम से दायर किया है। मालूम हो कि स्नेह नगर (पटेल नगर) में स्थित बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर में 30 मार्च को बावड़ी की स्लैब टूटने से 36 लोगों की मौत हुई थी। 

जांच हाईकोर्ट की निगरानी में कराने की मांग
लोकेंद्र जोशी ने बताया कि हमने जांच को अपर कलेक्टर अभय बेडेकर को सौंपने का भी विरोध किया है। हमने तर्क रखा है कि यह मामला नगर निगम के खिलाफ है और प्रशासनिक अधिकारियों के यहां नगर निगम के कर्मी पदस्थ रहते हैं। ऐसे में इसकी जांच प्रभावित हो सकती है। हमने याचिका में मांग की है कि हादसे की जांच हाई कोर्ट खुद अपनी निगरानी में कराए।
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कार्रवाई करने के बजाय नोटिस देता रहा निगम
याचिका में कहा गया है कि नगर निगम के अधिकारी सिर्फ नोटिस देते रहे जबकि उन्हें अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करना थी। समय रहते निगम जाग जाता और कार्रवाई कर दी जाती तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता। याचिका में कहा है कि जिम्मेदारों ने अपने कर्तव्य का पालन नहीं किया है, इसलिए निगम के जिम्मेदारों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए जाएं। 
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