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MP News: अहिल्या बाई होलकर की सभी संपत्तियां फिर खासगी ट्रस्ट को मिलेंगी, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को स्वीकारा

Fri, 22 Jul 2022 02:17 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला,खरगोन

सार

अहिल्या बाई होलकर की महेश्वर का किला समेत देशभर में फैली खासगी ट्रस्ट की तमाम संपत्तियां शासन को खासगी ट्रस्ट को फिर से सौंपनी पड़ेंगी। 
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महेश्वर का किला - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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देवी अहिल्या बाई होलकर की महेश्वर का किला समेत देशभर में फैली खासगी ट्रस्ट की तमाम संपत्तियां शासन को खासगी ट्रस्ट को फिर से सौंपनी पड़ेंगी। शासन ने पांच अक्टूबर 2020 के बाद अहिल्या बाई होलकर की जिन संपत्तियों को अधिग्रहित किया था, वे ट्रस्ट को फिर से वापस मिलेंगी। पांच अक्टूबर 2020 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने ट्रस्ट की संपत्तियों के संबंध में चल रही जनहित याचिकाओं का निराकरण करते हुए फैसला सुनाया था कि ट्रस्ट को संपत्तियां बेचने का अधिकार नहीं है। शासन ट्रस्ट के आधिपत्य की संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू करे और जो संपत्तियां ट्रस्ट बेच चुका है उसकी जांच की जाए। 
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ट्रस्ट ने हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। तीन जजों की बैंच ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था जो गुरुवार को जारी हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकारते हुए माना कि ये संपत्तियां न सरकार की हैं न होलकर परिवार की। ये संपत्तियां खासगी ट्रस्ट की हैं लेकिन इन्हें शासन की अनुमति के बगैर बेचा नहीं जा सकेगा। कोर्ट ने संपत्तियों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को शून्य घोषित करते हुए कहा है कि रजिस्ट्रार इस संबंध में जांच करेंगे। कानून विशेषज्ञों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद शासन को ट्रस्ट की उन सभी संपत्तियों को, जिन्हें उसने 5 अक्टूबर 2020 के बाद आधिपत्य में लिया है ट्रस्ट को लौटाना होगा। इसमें महेश्वर किला सहित देशभर में फैली ट्रस्ट की संपत्तियां शामिल हैं।

जानिए पूरा मामला
खासगी ट्रस्ट की संपत्तियों को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में चल रही याचिकाओं का निराकरण करते हुए हाईकोर्ट ने पांच अक्टूबर को दिए फैसले में माना कि खासगी ट्रस्ट को संपत्तियों को बेचने का अधिकार नहीं था। शासन ट्रस्ट की कथित संपत्तियों को अपने कब्जे में ले। इसके बाद मप्र शासन ने देशभर में फैली होलकर राज्य की संपत्तियों को कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू करते हुए कुछ संपत्तियों को कब्जे में ले भी लिया था। इस बीच मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। ट्रस्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर 2020 को हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी।
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होलकर परिवार ने कभी नहीं किया संपत्ति पर दावा
ट्रस्ट की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट अभिनव मल्होत्रा ने बताया कि गुरुवार को जारी हुए 71 पेज के फैसले में कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस फैसले को गलत माना है, जिसमें कहा है कि सारी संपत्तियां सरकारी हैं। कोर्ट ने माना कि 27 जून 1962 को जिस दिन ट्रस्ट की डीड तैयार की गई थीं उस दिन के बाद से ये संपत्तियां ट्रस्ट की रही हैं। राज्य सरकार, केंद्र सरकार और होलकर परिवार ने मिलकर ट्रस्ट का गठन किया था। होलकर राज परिवार ने कभी यह नहीं कहा कि ये संपत्तियां उसकी निजी हैं।
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