पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने अभ्यास मंडल की व्याख्यानमाला में विचार रखे।
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अभ्यास मंडल की 62वीं व्याख्यानमाला का बुधवार को पांचवां दिन था। मुख्य वक्ता सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी थे। उन्होंने 'वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य व नागरिकों की भूमिका' विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने नैतिकता की ताकत के बूते साम्राज्यवादी ताकत को शिकस्त दी। उन्होंने इसके लिए देश की जनता को जागृत किया। हर देश का इतिहास हुक्मरानों पर लिखा जाता है, लेकिन सचाई यह है कि इतिहास अवाम का ही रहता है।
तिवारी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी अंत्येष्टि, शादी, जन्मदिन में जाने की नहीं, बल्कि अच्छे कानून बनाने की है, लेकिन संसद में अब अच्छे कानून नहीं बन रहे है। अब न्यायपालिका की स्वततंत्रा पर सवाल उठते हैं।
इस पर देशवासियों को सोचने की जरूरत है, नहीं तो इस देश से संविधान समाप्त हो जाएगा। इस देश में अच्छे लोकतंत्र के लिए सरकारें आती जाती रहना चाहिए।
संविधान की रक्षा नागरिकों की जिम्मेदारी
तिवारी ने कहा कि जिन लोगों ने भारत को आजादी दिलाई। उन्होंने भारत के प्रति अपनी कल्पना को संविधान में पिरोया। उनकी सोच व्यापक थी। देश की संस्थाओं को उन्होंने स्वतंत्रता दी। उन्होंने कहा कि भारत देश बचेगा तो सिर्फ संविधान के कारण बचेगा। सरकारें आती जाती रहती हैं, लेकिन संविधान की रक्षा इस देश के नागरिक की जिम्मेदारी है। भारत विश्व का एक ऐसा देश है, जिसने लोकतांत्रिक परंपरा को बरकरार रखा। कई देश ऐसा नहीं कर पाए। इसका जीता जागता उदाहरण पाकिस्तान है।
अभ्यास मंडल की व्याख्यानमाला में उपस्थित श्रोता।
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गोदी मीडिया की परिपाटी गलत
तिवारी ने कहा कि वो मीडिया कभी स्वतंत्र हो ही नहीं सकता, जिसकी 90 प्रतिशत आमदनी विज्ञापनों से होती हो। यदि मीडिया अपना रेवेन्यू मॉडल बदलता तो ऐसे हालात नहीं बनते। अब मीडिया के सवाल खुद के नहीं है, वो कहीं और से आते हैं। ये तो अच्छा है कि सोशल मीडिया आ गया। भले ही उसमें लाख खामियां हों, लेकिन जनता को अपनी बात कहने का मौका मिला। देश के सामने यह सवाल है कि क्या लोकतंत्र गोदी मीडिया से चलेगा। आज उनकी गोदी है। कल हमारी गोदी होगी। ये परिपाटी ठीक नहीं है।
यूपीए सरकार के पतन का कारण बड़ा झूठ था
मनीष तिवारी ने श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि यूपीए सरकार का पतन एक बड़े झूठ ने किया, वो झूठ देश की संवैधानिक संस्था कैग ने बोला, जिसमें उसने एक लाख करोड़ का नुकसान की बात कही थी। जिसकी बाद में कोई जांच नहीं हुई।