इस तरह बिना ट्रीटमेंट के छोड़ा जा रहा था दूषित पानी।
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शिप्रा शुद्धिकरण के मामले को लेकर संतों की नाराजगी के चलते प्रशासन सख्त कदम उठा रहा है। ऐसी औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है जो बिना उपचार किए गंदा पानी कान्ह और सरस्वती नदियों में छोड़ रही हैं। इस क्रम में गुरुवार को इंदौर स्थित आकाश नमकीन पर कार्रवाई कर प्रोडक्शन यूनिट बंद करवाई।
दरअसल बुधवार को साधु-संतों का दल इंदौर पहुंचा था। प्रशासन ने दल को इंदौर में कान्ह-सरस्वती नदियों के पानी को और जल शुद्धिकरण संयंत्र को दिखाया। बताया कि किस तरह ट्रीटमेंट के बाद पानी छोड़ा जाता है। संतों ने औद्योगिक इकाइयों की शिकायत में सांवेर के कुछ उद्योगों के बारे में बताया था जिस पर प्रशासन ने पांच फैक्टरियों को सील किया था। प्रशासन ने सभी औद्योगिक इकाइयों को संकेत दिए कि बिना उपचारित किए पानी को न छोड़ा जाए।
इसी तरह के मामले में गुरुवार को प्रशासन ने आकाश नमकीन पर कार्रवाई की। यहां टीम पहुंची और प्रोडक्शन यूनिट बंद करवाई। कलेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि आकाश नमकीन की प्रोडक्शन यूनिट से गंदा, बदबूदार पानी टैंकर में भरकर ड्राइवर नदी में छोड़ने जा रहा था जिसे पकड़ा गया है। इसी के तहत आकाश नमकीन पर उक्त कार्यवाही की गई है। बताया जाता है कि टैंकर में जो गंदा, बदबूदार रसायनयुक्त पानी भरा हुआ था, उसको नगर निगम द्वारा कान्ह सरस्वती नदियों पर लगाए गए एसटीपी प्लांट भी साफ नहीं कर सकते हैं। प्लांट संचालकों को हिदायत दी गई है कि आज शाम तक प्लांट में चल रहे प्रोडक्शन को पूरा कर पूरा प्रोडक्शन बंद करें।
कलेक्टर ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए कि अब प्रोडक्शन यूनिट परिसर में गंदे पानी के उपचार के लिए एसटीपी लगाने के बाद ही आकाश नमकीन को प्रोडक्शन प्रारंभ करने की अनुमति दी जाए। कलेक्टर ने कहा इस तरह की कार्यवाही आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने सभी औद्योगिक इकाइयों से कहा है कि कोई भी बिना उपचारित पानी नदियों या अन्य जल स्रोतों में नहीं छोड़ें अन्यथा सख्त कार्यवाही की जाएगी। बड़ी औद्योगिक इकाइयों से को भी निर्देश दिए हैं कि वह अपने परिसर में ही वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाएं।