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इंदौर: वन मंत्री बोले कैमरे में दिख रही तस्वीर तेंदुए की ही, 11 दिसंबर को करूंगा मामले की समीक्षा

Mon, 06 Dec 2021 04:20 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

चिड़ियाघर से गायब हुए तेंदुए का चार दिन बीत जाने के बाद भी पता नहीं चल पाया है। इस बीच  वन मंत्री विजय शाह ने बयान दिया है कि कैमरे में जो जीव नजर आया है, वह तेंदुआ ही है। 11 दिसंबर को वे इस मामले की समीक्षा करेंगे।
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प्राणी संग्रहालय इंदौर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मध्य प्रदेश के इंदौर में चिड़ियाघर से गायब हुए तेंदुए का चार दिन बाद भी पता नहीं चल सका है। टीमें लगातार तलाश कर रही है, लेकिन अब तक तेंदुए को खोज निकालने में विफल रही है। मामले में चिड़ियाघर प्रबंधन और वन विभाग के बीच तनातनी भी सामने आई है। राज्य के वन मंत्री विजय शाह ने कहा है कि कैमरे में जो जीव नजर आया है, वह तेंदुआ ही है। 11 दिसंबर को वे इस मामले की समीक्षा करेंगे।
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वन मंत्री विजय शाह रविवार रात को इंदौर पहुंचे थे। उन्होंने घटना की जानकारी ली। संबंधित अधिकारियों से भी बात की। इस मामले में मंत्री शाह ने कहा है कि कैमरे में दिखाई दे रही तस्वीर तेंदुए की ही है। यह मैं अपने अनुभव से कह सकता हूं। तेंदुआ जिस तरह से चलता है, उससे अनुमान लगाया जा सकता है कि कैमरे में दिखाई दे रहा जानवर तेंदुआ ही है। वन मंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों और चिड़ियाघर  के प्रभारी डॉ. उत्तम यादव से मामले की पूरी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सावधानी के लिए फिलहाल चिड़ियाघर को बंद किया गया है। मामले में गलती किसकी रही इसकी भी जांच की जाएगी। इसके बाद फिलहाल मंगलवार तक चिड़ियाघर को बंद कर दिया गया है। 

नहीं मिला तेंदुए का सुराग
चार दिन पहले बुरहानपुर से मादा तेंदुए का रेस्क्यू कर इंदौर के चिड़ियाघर लाया गया था। पिंजरे से ही तेंदुआ रहस्यमय ढंग से गायब हो गया। वन विभाग और चिड़ियाघर की टीम उसकी तलाश कर रही है। 52 एकड़ में फैले चिड़ियाघर में 200 कर्मचारियों की टीमें लगातार खोजबीन में जुटी रही। 40 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों के फुटेज देखे गए लेकिन बिल्ली व कुत्ते तो नजर आए मगर तेंदुआ नहीं दिखा। दावा किया गया कि तेंदुआ चिड़ियाघर में ही है क्योंकि उसके पंजों के निशान देखे गए हैं। तेंदुए की तलाश के लिए रविवार को ढोल का सहारा लिया गया। अब इस तरह की बातें होने लगी हैं कि तेंदुए को चिड़ियाघर लाया गया भी था या नहीं। अब कहा जा रहा है कि जिस पिंजरे से तेंदुआ भागा है, उसमें तिरपाल जस का तस था। तेंदुआ भागता तो तिरपाल अस्त-व्यस्त होता। चिड़ियाघर और वन विभाग के अधिकारी भी स्थिति स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं। 
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