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इंदौर: दो विधानसभा क्षेत्रों के सीमा विवाद की वजह से बच्चों की जान जोखिम में, जुगाड़ की नाव से जा रहे हैं स्कूल

Sat, 13 Nov 2021 02:06 PM IST
रवींद्र भजनी चंद्रप्रकाश शर्मा, इंदौर, अमर उजाला

सार

इंदौर के हिरली और सिमरोड़ के बीच में शिप्रा नदी बहती है। हिरली के स्कूली बच्चों को कक्षा-5 के बाद सिमरोड़ में पढ़ना होता है। इसके लिए जुगाड़ की नाव से नदी को पार करना पड़ता है। 
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इस तरह जुगाड़ की नोट पर सवार होकर शिप्रा नदी को पार करते हैं ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में दो विधानसभा क्षेत्रों के सीमा विवाद की वजह से स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर जुगाड़ की नाव से स्कूल जा रहे हैं। ग्रामीण 35 साल से शिप्रा नदी पर पुल बनाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं, पर कोई सुनने वाला नहीं है।  मामला इंदौर जिले के हिरली गांव का है। यहां के बच्चों को जुगाड़ की नाव पर सवार होकर शिप्रा नदी पार करनी पड़ती है। ऐसा नहीं है कि पुल बनाने के प्रयास नहीं हुए। हुए भी पर हर बार विधानसभा क्षेत्रों की सीमा स्पष्ट न होने की वजह से अटक गए। एक तरफ देवास का हाटपीपल्या विधानसभा क्षेत्र है तो दूसरी ओर इंदौर सांवेर विधानसभा क्षेत्र। दोनों ही विधायक भाजपा के हैं। इसके बाद भी हिरली गांव के लोगों को समस्या से छुटकार नहीं मिल रहा है। 
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इस नाव को बनाया गया है शिप्रा नदी को पार करने के लिए। - फोटो : अमर उजाला
जुगाड़ की नाव
हिरली में कक्षा-5 तक का स्कूल है। आगे की पढ़ाई के लिए बालिकाओं को सिमरोड़ जाना पड़ता है। बीच में शिप्रा नदी है। इस नदी पर पुल नहीं है। इस वजह से ग्रामीणों ने एक जुगाड़ की नाव बनाई है। दोनों किनारों पर एक रस्सी बंधी है। चार ड्रम पर एक प्लेटफॉर्म बनाया गया है। उस पर बच्चे खड़े होते हैं और रस्सी खींचकर दूसरे गांव तक जाते हैं। ग्रामीण भी अपने कामकाज के लिए इसी नाव का सहारा लेते हैं।  

35 साल से आंदोलन  
हिरली गांव में शिप्रा नदीं पर पुल बनाने के लिए ग्रामीण 35 साल से आंदोलन कर रहे हैं। नेताओं से भी मिले, पर आश्वासनों के आगे कागज नहीं दौड़े। बेशर्म की माला पहनाकर विरोध भी जताया। नारेबाजी और धरना भी दिया। ग्रामीण हंसराज मंडलोई का कहना है कि हम लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। प्रशासन व नेताओं को जगाने के लिए बेशर्म के फूलों के साथ प्रदर्शन भी किया, पर कुछ नहीं मिला। वहीं, छात्रा महक पठान का कहना है कि इंदौर की ख्याति पूरी दुनिया में है और इसी जिले में हमारी स्थिति चंबल के बीहड़ों से भी बदतर है। 

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इस तरह नदी पार करते हैं ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला
तीन जिलों की सीमा पर है गांव 
ग्राम सिमरोड़ के दिलीप सिंह एवं हिरली के कयूम पठान कहते हैं कि हमारे गांव तीन जिलों की सीमा पर हैं। सुमित्रा महाजन और थावरचंद गहलोत जैसे दिग्गज नेताओं ने यहां का प्रतिनिधित्व किया है। हमारे विधायक मंत्री भी रहे हैं। इसके बाद भी नई पीढ़ी को जान जोखिम में डालकर पढ़ाई के लिए जाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अगर जल्दी पुल नहीं बना तो महापंचायत बुलाएंगे और नेताओं को क्षेत्र में घुसने नहीं देंगे। 

जनप्रतिनिधियों ने कहा- प्रस्ताव तैयार हो रहा है
इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि कोरोना काल से पहले यह मामला जानकारी में आया था। इसके बाद लोक निर्माण विभाग और राज्य सरकार को पत्र लिखा है। अब तक प्रस्ताव क्यों नहीं बना, इसकी जानकारी ले रहा हूं। सांवेर विधायक और मध्यप्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट का कहना है कि यह मामला गंभीर है। अधिकारियों से प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव बनाने को कहा है। 
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