इस नाव को बनाया गया है शिप्रा नदी को पार करने के लिए।
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जुगाड़ की नाव
हिरली में कक्षा-5 तक का स्कूल है। आगे की पढ़ाई के लिए बालिकाओं को सिमरोड़ जाना पड़ता है। बीच में शिप्रा नदी है। इस नदी पर पुल नहीं है। इस वजह से ग्रामीणों ने एक जुगाड़ की नाव बनाई है। दोनों किनारों पर एक रस्सी बंधी है। चार ड्रम पर एक प्लेटफॉर्म बनाया गया है। उस पर बच्चे खड़े होते हैं और रस्सी खींचकर दूसरे गांव तक जाते हैं। ग्रामीण भी अपने कामकाज के लिए इसी नाव का सहारा लेते हैं।
35 साल से आंदोलन
हिरली गांव में शिप्रा नदीं पर पुल बनाने के लिए ग्रामीण 35 साल से आंदोलन कर रहे हैं। नेताओं से भी मिले, पर आश्वासनों के आगे कागज नहीं दौड़े। बेशर्म की माला पहनाकर विरोध भी जताया। नारेबाजी और धरना भी दिया। ग्रामीण हंसराज मंडलोई का कहना है कि हम लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। प्रशासन व नेताओं को जगाने के लिए बेशर्म के फूलों के साथ प्रदर्शन भी किया, पर कुछ नहीं मिला। वहीं, छात्रा महक पठान का कहना है कि इंदौर की ख्याति पूरी दुनिया में है और इसी जिले में हमारी स्थिति चंबल के बीहड़ों से भी बदतर है।
इस तरह नदी पार करते हैं ग्रामीण।
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