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इंदौर: कोरोना संक्रमित हुए 12 बच्चे, ठीक होने के बाद नजर आए दूसरे रोगों के लक्षण, चार की मौत

Sun, 23 May 2021 06:32 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

माना जा रहा है कि कोरोना की तीसरी लहर में बच्चे ज्यादा संक्रमित होंगे। पहली लहर में इनमें पर बहुत कम असर दिखा। दूसरी में यह बढ़ा और तीसरी में ये बड़े पैमाने पर संक्रमित हो सकते हैं। 
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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मध्यप्रदेश के इंदौर के अरबिंदो अस्पताल में बीते दिनों 12 ऐसे बच्चे भर्ती हुए थे, जिनमें कोरोना के लक्षण नहीं थे। अस्पताल में जब इनका एंटीबॉडी टेस्ट कराया गया तो पता चला कि इन्हें कोरोना हुआ था और ये उबर गए थे, लेकिन कोरोना वायरस ने इसके बाद इन्हें दूसरे रोग दे दिए। इन रोगों के चलते चार बच्चे दम तोड़ चुके हैं। 

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अरबिंदो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के संचालक डॉ. विनोद भंडारी का कहना है कि बाल रोग विभाग में कुछ ऐसे बच्चे भी भर्ती हुए, जिनमें कोरोना के लक्षण नहीं थे या उनके स्वजन महामारी के लक्षणों को नहीं पहचान सके। जब ऐसे बच्चों की जांच की गई तो उनमें मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम दिखाई दिया। इन बच्चों को लगातार बुखार रहा और महामारी के हल्के लक्षण जैसे कि सिरदर्द, सर्दी-खांसी आदि। इसे संक्षेप में मल्टी इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम इन चाइल्ड यानी एमआईएस-सी भी कहा जाता है। 

कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई थी
डॉ. भंडारी के अनुसार जब उक्त बच्चों में से कुछ की कोविड जांच की गई तो रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद इन बच्चों के एंटीबॉडी टेस्ट किए गए तो उनमें एंटीबॉडी पाई गई। यानी ये बच्चे संक्रमित हुए थे, लेकिन उनमें महामारी के लक्षण नजर नहीं आए। जब उन्हें एमएसआईएस हुआ तो ये गंभीर बीमारी के शिकार हो गए। इस कारण उनका इलाज जीवन रक्षक दवाइयों से करना पड़ा। इन 12 बच्चों में से चार की मौत हो गई। 
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क्या होता है एमएसआई सिंड्रोम
विशेषज्ञों के अनुसार मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम कोई बीमारी नहीं है। यह लक्षणों पर आधारित सिंड्रोम कहा जाता है। इसके शिकार बच्चों के फेफड़ों, दिल, पाचन तंत्र, गुर्दे, त्वचा, मस्तिष्क और आंखों में इंफेक्शन पाया गया।

दूसरी लहर में 10 से 20 फीसदी बच्चों पर असर
इंदौर के एमवायएच अस्पताल के डॉक्टर हेमंत जैन का कहना है कि पहली लहर में बच्चे मामूली शिकार हुए थे, लेकिन उन्हें भर्ती करने की नौबत भी नहीं आई थी।, लेकिन मौजूदा दूसरी लहर में 10 से 20 फीसदी तक बच्चे संक्रमित हो रहे हैं। अभी भी वे ठीक तो जल्दी हो रहे हैं, लेकिन उनके हृदय, फेफड़े, किडनी व पेट जैसे अंग प्रभावित हो रहे हैं। डॉ. जैन ने आशंका जताई है कि तीसरी लहर में बच्चों पर महामारी का प्रकोप बढ़ सकता है। 

बच्चों पर कोरोना से उबरने के बाद ये घातक लक्षण 
इंदौर के बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना से उबर चुके बच्चों में मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम के तहत आंखें लाल होना, शरीर पर दाने उभरना, जुबान लाल होना,  धड़कनें तेज होना, सुस्ती आना, सांस फूलना, हृदय रोग के लक्षण नजर आ रहे हैं। ऐसे में उनका समुचित व समय पर इलाज जरूरी है। 

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