आंखों देखा हाल मुरैना के तीन छात्रों ने परिवार को भेजे वीडियो में बयां किया है।
- फोटो : अमर उजाला
हम लोग मेडिकल के स्टूडेंट हैं। कल सवा ग्यारह बजे की एयर इंडिया की फ्लाइट पकड़ने आए थे। जब हम एयरपोर्ट पहुंचे तो वहां रशियन आर्मी ने हमला कर दिया। वहां ब्लास्ट होने लगे तो हमें एयरपोर्ट से भगा दिया गया। हम लोग जैसे-तैसे वहां से निकले और इंडियन एम्बेसी के कॉन्टैक्ट में आए। हमें एम्बेसी ने सुरक्षित जगह रुकवाया। जहां हम रुके हैं, वो एक स्कूल है। यहां के एक प्लेइंग कोर्ट में करीब 400 बच्चे रोक रखे हैं। खाने-पीने की व्यवस्था है पर इतने बच्चों के बीच काफी नहीं है। लड़के-लड़कियां, सभी को एक जगह ही ठहराया गया है। सोने के लिए योगा मेट दे रखे हैं, वो भी उतने नहीं हैं। हम एडजस्ट कर ले रहे हैं। हमें यहां 24 घंटे से ज्यादा समय हो गया है। पता नहीं कब यहां से निकल पाएंगे। हालांकि ये जगह सुरक्षित बताई जा रही है। कीव के अन्य जगहों पर धमाके हो रहे हैं। हमें बताया गया है कि ये सिविलियन एरिया है, इसलिए सुरक्षित है। बाहर की स्थिति ठीक नहीं है। आसपास ब्लास्ट की आवाजें आ रही हैं। हम भारत सरकार से निवेदन करते हैं कि जितनी जल्दी हो, हमें यहां से निकाला जाए।
ये आंखों देखा हाल मुरैना के तीन छात्रों ने परिवार को भेजे वीडियो में बयां किया है। मुरैना जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. पद्मेश उपाध्याय की बेटी योगमाया उपाध्याय यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। उनके साथ मुरैना के ही समक्ष पाराशर तथा वेदांत कुलश्रेष्ठ नामक छात्र हैं। ये तीनों छात्र मुरैना स्थित गांधी कॉलोनी के रहने वाले बताए गए हैं। यूक्रेन पर अचानक रूस द्वारा हमला बोलने से मुरैना के ये तीनों छात्र यूक्रेन में फंस गए हैं।
एयरपोर्ट पर हमले के बाद छात्र पैदल-पैदल यूक्रेन की राजधानी कीव में इंडियन एम्बेसी के दफ्तर पहुंचे।
- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार योगमाया से फोन पर परिजनों की चर्चा हुई तो उसने बताया कि 24 फरवरी को भारत वापस आने के लिए उनकी फ़्लाइट बुक थी, लेकिन रूस के लगातार हो रहे हमलों से यह फ्लाइट रद्द कर दी गई। फ्लाइट कैंसिल होने की वजह से वे किसी तरह से पैदल-पैदल यूक्रेन की राजधानी कीव में इंडियन एम्बेसी के दफ्तर पहुंचे। यहां पर इंडियन एम्बेसी ने उनको 400 अन्य छात्रों के साथ सुरक्षित जगह पर ठहरा दिया है। भारत सरकार इनको प्लान-बी के तहत सुरक्षित भारत लाने की तैयारी कर रही है। हालांकि परिजनों की छात्रों से बराबर चर्चा हो रही है, लेकिन फिर भी उनकी सुरक्षा को लेकर परिजनों को चिंता सता रही। वे सरकार से अपने बच्चों को सुरक्षित भारत वापिस लाने की गुहार लगा रहे हैं।
योगमाया के पिता डॉ. पद्मेश उपाध्याय का कहना है कि बेटी की सुरक्षा को लेकर वे काफी चिंतित है। वहां से भारतीय छात्र कब भारत वापिस लौटकर आ रहे है, इसके बारे में अभी कोई ठोस जानकारी नहीं है। टीवी चैनल तथा अखवारों के माध्यम से ही भारत सरकार द्वारा किए जा रहे उपायों की जानकारी मिल रही है। सरकार से एक ही विनती है कि, किसी तरह से हमारे बच्चों को सुरक्षित भारत वापस लेकर आएं।