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मध्यप्रदेश: सहायक आबकारी आयुक्त के ठिकानों पर छापे में मिली 25 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति

Wed, 16 Oct 2019 02:30 PM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

  • भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, छतरपुर और रायसेन में एक साथ की गई कार्रवाई
  • मंगलवार तड़के लोकायुक्त की सात टीमों ने अलग-अलग ठिकानों पर मारा छापा
  • साल 1998 में जिला आबकारी अधिकारी के पद से भर्ती हुए थे आलोक कुमार खरे
  • खरे को अब तक होनी चाहिए थी करीब 90 लाख रुपए की आय
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आलोक खरे के ठिकानों पर लोकायुक्त की छापेमारी - फोटो : ANI
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विस्तार
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लोकायुक्त पुलिस की इंदौर के सहायक आबकारी आयुक्त आलोक कुमार खरे के ठिकानों पर मंगलवार तड़के शुरू हुई छापेमारी में 25 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का खुलासा हुआ है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, छतरपुर और रायसेन स्थित ठिकानों पर लोकायुक्त की सात अलग-अलग टीमों ने एक साथ यह दबिश दी थी।
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बता दें कि लोकायुक्त पुलिस ने देर रात तक खरे की करीब 7 करोड़ की संपत्ति का पता चलने का दावा किया था। हालांकि इसकी वास्तविक कीमत करीब 25 करोड़ रुपए से ज्यादा आंकी गई है। सहायक आबकारी आयुक्त आलोक कुमार खरे साल 1998 में जिला आबकारी अधिकारी के पद से भर्ती हुए थे, ऐसे में उन्हें अब तक करीब 90 लाख रुपए की आय होनी चाहिए थी।

लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, करीब सात महीन पहले उसे खरे के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत मिली थी। मंगलवार की सुबह करीब साढ़े पांच बजे एक टीम राजधानी भोपाल के पास चौपड़ा कलां स्थित उनके फार्म हाउस पर पहुंची। दूसरी टीम ने भोपाल के जाटखेड़ी स्थित गोल्डन सिटी स्थित बंगले पर, दो टीमों ने इंदौर, एक टीम ने छतरपुर और एक टीम ने ग्वालियर में दबिश दी।
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दस मिनट बाद खुला दरवाजा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चौपड़ा कलां स्थित फॉर्म हाउस का दरवाजा दस्तक दिए जाने के दस मिनट बाद खुला। टीम ने तीन भागों में बंटकर तलाशी शुरू की। देर रात तक कार्रवाई के दौरान भोपाल में तीन मकान, रायसेन में 70 एकड़ भूमि, 21 लाख रुपए नकद, भोपाल के एक मॉल में एक दुकान, करीब एक किलोग्राम सोने के जेवर और अन्य संपत्ति से जुड़े कागजात भी मिले।

तो क्या खरे को पहले से थी छापे मारे जाने की भनक
रिपोर्ट्स के अनुसार, लोकायुक्त के छापे की भनक खरे को संभवत: पहले से थी। प्रशासनिक गलियारों में यह सवाल तैर रहा है। कारण कि सोमवार रात पुलिस और प्रशासन ने एक पब और बार में जांच की थी। इस दौरान पुलिस, प्रशासन और आबकारी की संयुक्त टीम बनी थी। तीनों विभागों का एक सोशल मीडिया पर ग्रुप है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी ग्रुप में रात करीब 11 बजे खरे ने एक मैसेज पोस्ट किया था कि टीम विल भी देयर आन टाइम...। इस संदेश के महज सात घंटे बाद ही लोकायुक्त पुलिस की टीम उनके ठिकानों पर पहुंच गई।

माता-पिता का बीपी बढ़ने पर बुलानी पड़ी एंबुलेंस

छतरपुर की सी-निट्स कॉलोनी में खरे के पूर्व प्राचार्य पिता लालजी खरे के निवास पर छापामार कार्रवाई सुबह करीब चार बजे शुरू हुई। इस दौरान टीम ने बाजार से चाय-नाश्ता भी बुलाया।

इसके कुछ समय बाद आलोक खरे के बुजुर्ग माता-पिता ने टीम को ब्लड प्रेशर बढ़ने और घबराहट होने की बात कही। इस पर डीएसपी राजेश खेड़े ने स्थानीय पुलिस की मदद से एंबुलेंस बुलाकर घर पर ही उनकी चिकित्सा व्यवस्था कराई।

दफ्तर से घर जाने से 20 मिनट पहले चालू करवाते थे कार का एसी

घूमने, महंगी होटल में रुकने के शौक: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खरे परिवार के साथ अक्सर पर्यटन स्थलों पर घूमने जाते थे। उन्हें महंगी होटलों में रुकने का भी शौक है। सिर्फ यही नहीं दफ्तर से घर जाने के लिए निकलने से करीब बीस मिनट पहले वह कार का एसी चालू करवाते थे, ताकि कार पूरी तरह से ठंडी हो जाए। 

लोकायुक्त पुलिस ने खरे की पत्नी को भी बनाया आरोपी

खरे साल 1998 में जिला आबकारी अधिकारी पद पर भर्ती हुए थे। वह खंडवा, सीहोर, रतलाम, झाबुआ, धार, इंदौर और भोपाल में तैनात भी रहे। अब छापेमारी के बाद आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने उनकी पत्नी को भी आरोपी बनाया है।

85 हजार की कुर्सी आई, तब दफ्तर में बैठे
इंदौर में खरे की तैनाती करीब एक साल पहले हुई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, शराब ठेकेदार और पब संचालकों से उनकी अच्छी बातचीत है। प्रशासनिक संकुल स्थित दफ्तर में वह तब आकर बैठे, जब उनके लिए 85 हजार रुपए की कुर्सी और सवा लाख रुपए की टेबल रखी गई। ये इंतजाम किसने किया यह आज भी अनुत्तरित सवाल हैै। 
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कृषि से दिखाई आय, फार्महाउस में सैकड़ों फलदार पेड़

खरे का रायसेन के चौपड़ा कलां में 36 एकड़ जमीन पर एक फार्म हाउस है। यहां सैकड़ों पेड़ फलदार हैं। इन्हीं फलों को दिल्ली-बेंगलुरू के बाजार में बेचकर आय होना बताया गया है। रायसेन के डबरा इमलिया में दूसरा फार्म हाउस 34 एकड़ का है।

परामर्श शुल्क के चुकाए 34 लाख रुपए
कार्रवाई के दौरान टीम को रायसेन स्थित फार्म हाउस से दो चेक भी मिले, जिससे सोमवार को एक रजिस्ट्री के होने का पता चला। साथ ही यह भी पता चला कि खरे ने अब तक करीब 34 लाख रुपए का सीए का परामर्श शुल्क के तौर पर चुकाए हैं।
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