कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को कमला नेहरू हॉस्पिटल पहुंचकर हालात का जायजा लिया। उन्होंने पीड़ितों से मुलाकात की। भर्ती किए गए मासूमों का हाल-चाल भी जाना।
अस्पताल के दौरे के बाद कमलनाथ ने मीडिया से कहा कि यह घटना राजनीति का विषय नहीं है, लेकिन सिस्टम की लापरवाही सबके सामने है। छह महीने में इसी अस्पताल में यह तीसरी घटना हुई है। भाजपा सरकार हर मामले को दबाने-छुपाने का काम करती है। अब इस घटना के भी मौत के आंकड़े दबाने का काम किया जा रहा है। पहले कोरोना से भी प्रदेश में 2.5 लाख से अधिक मौतें हुई लेकिन सरकार आंकड़े दबाती-छुपाती रही। कोरोना में भी जब ऑक्सीजन, रेमडेसिविर की कमी से मौतें हुई, तब ये जागे और अभी भी इस घटना के बाद तमाम एक्कीशन बात हो रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की कि हाईकोर्ट के मौजूदा जज की निगरानी में हादसे की जांच की जाए। जो खुद जिम्मेदार थे, उनसे जांच करवाई जा रही है। परिजनों को बच्चों से मिलने नहीं दिया जा रहा है। मैंने खुद अस्पताल के हाल देखे हैं। दिल दहला देने वाले हालात है। अस्पताल में फायर एक्स्टिंग्विशन बंद था। आग से बचाव के कोई इंतजाम नहीं थे। फायर एनओसी तक नहीं थी। कमलनाथ के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, विजय लक्ष्मी साधो, विधायक आरिफ मसूद, मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा , जिला कांग्रेस अध्यक्ष कैलाश मिश्रा आदि मौजूद थे।
भाजपा को मौतों से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला
कमलनाथ ने कहा कि मैं यह मांग करता हूं कि जवाबदार दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। जिम्मेदार मंत्री को तत्काल पद से हटाया जाए। भाजपा को इन मौतों से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। वह तो 15 नवंबर के मेगा इवेंट शो की तैयारियों में लगी हैं। उन्हें पीड़ित परिवारों की कोई चिंता नही है।
प्रशासन ने आज सौंपा मृत बच्चा
गुनगा निवासी करण और उनकी पत्नी निकिता को हमीदिया प्रशासन ने थोड़ी देर पहले मृत बच्चा सौंपा। यह बच्चा 12 दिन का था। कल शाम को निकिता ने उसे दूध पिलाया था। उसके बाद वह मिल नहीं पाई थीं। प्रशासन ने उन्हें बच्चा सौंपा और कहा कि यह मृत है। निकिता का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही से उसका बच्चा खत्म हुआ है।