ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अस्थियों का संचय किया।
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ग्वालियर राजघराने की राजमाता माधवी राजे सिंधिया के अंतिम संस्कार के दूसरे दिन शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया छतरी मैदान पहुंचे। यहां उन्होंने नम आंखों से अस्थियों का संचय किया और रस्में निभाईं। अगले 9 दिन तक अस्थि कलश को छतरी मैदान के माधव बाग में रखा गया है। इसके बाद अस्थियों को अलग-अलग कलशों में नेपाल, उज्जैन और प्रयागराज ले जाकर विसर्जित किया जाएगा। बतादें कि 15 मई सुबह 9.28 बजे दिल्ली एम्स में राजमाता माधवी राजे सिंधिया ने अंतिम सांस ली थी। गुरुवार शाम को छतरी मैदान में वे पंचतत्व में विलीन हो गईं थीं।
अस्थि कलश संचय के दौरान सिंधिया के बेटे महान आर्यमन सिंधिया, परिवार के करीबी लोग, मंत्री तुलसीराम सिलावट, मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर मौजूद रहे। इस दौन कई और भी लोग वहां पहुंचे थे, लेकिन उन्हें बाहर ही रोक दिया गया। राज परिवार के करीबी बाल खांडे ने बताया कि अस्थि संचय के बाद घर में शुद्धिकरण किया जाएगा और कुछ क्रियाएं होंगी। इसके बाद सिंधिया महल में वीवीआईपी मेहमानों के आने जाने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। परिवार के लोग 9 दिन तक प्रतिदिन शाम 7 बजे तक आने वालों के लिए बैठेंगे। स्थानीय प्रशासन से कई कैबिनेट मिनिस्टर के ऑफिस से कार्यक्रम की डिटेल मांगी गई है।
अस्थि संचय के लिए पहुंचे मंत्री तुलसीराम सिलावट को मौके पर व्यवस्थाओं में कुछ कमी दिखी। उन्होंने वहीं से जिम्मेदार अधिकारियों को फोन लगाया। सिलावट ने कहा कि अंतिम संस्कार के समय की गई व्यवस्थाएं ठीक नहीं थीं। लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। महिलाओं के लिए अलग से बैठने या लाइन की कोई व्यवस्था नहीं थी। लोग पानी न मिलने के कारण परेशान होते हुए नजर आए।
कल किया गया था अंतिम संस्कार
ग्वालियर राजघराने की राजमाता और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की मां माधवी राजे सिंधिया का बुधवार सुबह निधन हो गया था। वह 76 वर्ष की थीं। माधवी राजे लंबे समय से बीमार चल रही थीं। 15 फरवरी को उन्हें एम्स में भर्ती किया गया था। 15 मई सुबह 9.28 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली थी। बीते गुरुवार शाम को उनका सिंधिया छतरी में अंतिम संस्कार किया गया था।