सार
ग्वालियर में जलभराव और सीवर समस्या पर हाईकोर्ट ने नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि फिलहाल प्यार से समझा रहे हैं, नहीं माने तो सख्ती करेंगे। निगम को जवाब दाखिल करने के लिए 7 जुलाई तक का समय दिया गया।
सीवर और जलभराव की समस्या को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ग्वालियर हाई कोर्ट ने नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अभी तुम्हें प्यार से समझा रहे हैं, अगर फिर भी नहीं माने तो जिस भाषा में समझते हो, उसी भाषा में समझाया जाएगा।"
याचिकाकर्ता कैप्टन उद्देश्य सिंह भदौरिया ने अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया के माध्यम से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि पिछले वर्ष मानसून के दौरान ग्वालियर शहर में जलभराव, सीवर ओवरफ्लो और बदहाल सड़कों के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद नगर निगम और प्रशासन स्थायी समाधान करने में विफल रहे।
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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से इस वर्ष प्री-मानसून की पहली बारिश के बाद वार्ड क्रमांक 18, 19 सहित अन्य क्षेत्रों में जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की तस्वीरें अदालत के समक्ष पेश की गईं। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि जब पहली ही बारिश में शहर के हालात बिगड़ गए हैं, तो मानसून के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है। इस पर खंडपीठ ने नगर निगम के अधिवक्ता से पूछा कि क्या निगम यह आश्वासन देने को तैयार है कि इस वर्ष शहर में पिछले साल जैसी जलभराव और सीवर की समस्या नहीं होगी।
नगर निगम की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा गया। इस पर हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, "हम अभी नगर निगम को प्यार और शांति से समझा रहे हैं। यदि फिर भी नहीं माने, तो जिस भाषा में समझेंगे, उसी भाषा में समझाना पड़ेगा। हमारा उद्देश्य ग्वालियर के नागरिकों को इन समस्याओं से राहत दिलाना है। अदालत ने नगर निगम को अगली सुनवाई तक विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को होगी।