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ग्वालियर बेंच का अहम आदेश: पति-पत्नी के दांपत्य संबंध पर धारा 377 लागू नहीं, हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

Sat, 28 Mar 2026 06:26 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने कहा कि वयस्क पति-पत्नी के बीच दांपत्य संबंधों पर धारा 377 लागू नहीं होती। कोर्ट ने पति के खिलाफ दर्ज यह आरोप निरस्त करते हुए अन्य धाराओं में जांच जारी रखने के निर्देश दिए।

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जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अप्राकृतिक संबंध, दहेज एक्ट सहित अन्य धाराओं के तहत पत्नी की शिकायत पर दर्ज मामले को चुनौती देते हुए पति द्वारा हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में याचिका दायर की गई थी। न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फडके की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा कि पति और उसकी वयस्क पत्नी के बीच स्थापित दांपत्य संबंधों को बलात्कार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून में बलात्कार की परिभाषा का विस्तार करते हुए कुछ कृत्यों को शामिल किया गया है, लेकिन विवाह के दौरान पति-पत्नी के बीच ऐसे संबंधों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 377 लागू नहीं होती। इसी आधार पर एकलपीठ ने पति के खिलाफ धारा 377 के तहत दर्ज अपराध को निरस्त कर दिया।

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पीड़ित पति की ओर से दायर याचिका में पत्नी द्वारा दर्ज कराए गए प्रकरण धारा 498ए, 354, 377, 323, 294 और 506 को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया कि दोनों का विवाह हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। शिकायत के अनुसार, विवाह के समय दहेज में नकद राशि, सोने के आभूषण और घरेलू सामान दिया गया था।

पत्नी ने आरोप लगाया था कि पति अतिरिक्त धन की मांग करता था और परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा भी उसके साथ दुर्व्यवहार किया जाता था। साथ ही, उसने पति पर अप्राकृतिक कृत्य करने और उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था।

अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि वयस्क पति-पत्नी के बीच दांपत्य संबंधों को लेकर धारा 377 के तहत मामला चलाना उचित नहीं है। इसके साथ ही एकलपीठ ने आरोपी ननद के खिलाफ दर्ज एफआईआर तथा पति के खिलाफ धारा 377 के तहत दर्ज प्रकरण को रद्द करने के आदेश जारी किए।

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