गुना में हुए दर्दनाक हादसे में जिन लोगों ने अपने परिवार के सदस्य को खो दिया है, उनके घरों में अभी भी मातम पसरा हुआ है। पांच दिन पहले गुना में दर्दनाक हादसे में 13 लोग जिंदा जल गए थे, जिसमें से दो शवों की पहचान पुलिस ने पहले ही करके उनके परिजनों को सौंप दी थी। शव पूरी तरह से जल गए थे, बाद में डीएनए के आधार पर शवों की पहचान की गई थी।
बता दें कि सभी शव बुरी तरह जल गए थे। इनमे से दो शवों की पहचान पहले ही हो गई थी। शिनाख्त होने के बाद परिवार वालों को सुपुर्द कर दिए गए थे। वहीं, 11 शवों की पहचान नहीं हो पाई थी। इनकी पहचान के लिए डीएनए जांच कराई गई थी। ग्वालियर एफएसएल में डीएनए जांच की गई।
कैसे हुआ था हादसा?
विगत 27 दिसंबर की रात में गुना से आरोन के लिए रवाना हुई सिकरवार यस सर्विस की यात्री बस सेमरी मंदिर कटी पाटी के पास एक डंपर से भीड़ गई थी। इस भिड़ंत के बाद बस में आग लग जाने से उसमें सवार 13 यात्री जिंदा जल गए थे, जिनकी मौत हो गई थी। जबकि दुर्घटना में 16 यात्री घायल हो गए थे, जो की जिला चिकित्सालय में उपचारत हैं।
इसके बाद दो मृतकों की शिनाख्ती हो जाने पर उनके शव परिजनों को विगत दिवस ही सौंप दिए गए थे। वहीं, दुर्घटना में मृतकों के शव पूरी तरह जल जाने के कारण उनकी शिनाख्तगी संभव नहीं थी और इसीलिए उनके शवों के कुछ अवशेष डीएनए जांच के लिए भेजे गए थे। जांच कर डीएनए मिलान के कार्य को ग्वालियर की फॉरेंसिक लैब में प्राथमिकता से लेते हुए जांच कार्य तेजी से कराया गया, जिसके लिए लैब के कर्मचारियों को शनिवार-रविवार के अवकाश को भी निरस्त कर ड्यूटी पर बुलाया गया था।
तेजी से किए गए कार्य के बाद अंतत: डीएनए मिलान का कार्य रविवार रात पूरा हो जाने के बाद डीएनए रिपोर्ट गुना पुलिस को मिल गई थी। इसी को देखते हुए मृतकों के परिजनों को रविवार रात में ही शव सौंपने का हवाला देते हुए जिला चिकित्सालय बुलाया गया था। लेकिन रात में उन्हें शव नहीं सौंपे गए और सोमवार की सुबह तक के लिए टाल दिया गया था। इसके दुर्घटना में 11 मृतकों के शव स्थानीय जिला चिकित्सालय में उनके परिजनों को सौंप दिए गए। इस दौरान प्रशासन व पुलिस की ओर से मौजूद अधिकारियों की देख रेख में कार्रवाई पूरी की गई।