लोकसभा चुनाव-2014 के मतदान के तीसरे चरण में मध्य प्रदेश की नौ सीटों पर शाम पांच बजे तक 54 फीसदी मतदान हुआ है। ज्यादातर सीटों पर 2009 के मुकाबले मतदान के प्रतिशत में सुधार आया है। छत्तीसगढ़ की बस्तर सीट पर मतदान शाम 47 फीसदी रहा। मध्य प्रदेश में छिंदवाड़ा से कमलनाथ, सतना से अजय सिंह और वकील विवेक तनखा जैसे बड़े नामों का भविष्य इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन में कैद हो गया।
आठ बार लोकसभा के लिए चुने गए कमलनाथ छिंदवाड़ा से दसवीं बार चुनाव लड़ रहे हैं। छिंदवाड़ा में मतदान 71 फीसदी रहा। मतदान रीवा में 41.75 फीसदी, सीधी 40.25 फीसदी, जबलपुर 53.22 फीसदी, बालाघाट 59.73, मंडला 60.92, शहडोल 43.29, होशंगाबाद 58.96 और सतना में 49.57 फीसदी मतदान रहा।
चुनाव आयोग के अंतिम आंकड़े आना बाकी हैं। मतदान के प्रतिशत से यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि वह किसके पक्ष में जाएगा। मध्य प्रदेश की राजनीति दोध्रुवीय रही है। फिर भी कई सीटों पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार भी खड़े किए गए हैं।
पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि गेहूं की कटाई और तेज गर्मी के कारण मतदान के प्रतिशत में कमी आ सकती है। 2009 में इन नौ सीटों में से रीवा सीट बसपा ने जीती थी। भाजपा और कांग्रेस के पास 4-4 सीटें थीं। होशंगाबाद से कांग्रेस के सांसद उदयप्रताप विधानसभा चुनाव के पहले ही पालाबदल कर भाजपा में चले गए थे। अब भाजपा के टिकट पर उदयप्रताप ने होशंगाबाद से चुनाव लड़ा है। उनके मुकाबले कांग्रेस के देवेंद्र पटेल चुनाव मैदान में हैं।
नौ सीटों के संघर्ष में सबसे अहम सीटें कमलनाथ और अजय सिंह की ही हैं। सतना में कांग्रेस के मैहर से विधायक नारायण त्रिपाठी दो दिन पहले ही पाला बदलकर भाजपा में चले गए हैं। उनका सतना सीट के करीब दो-ढाई लाख ब्राह्मण वोटों पर खासा असर है। वहीं भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी गणेश सिंह पटेल समुदाय से हैं। वोटों का यह गणित यदि लागू होता है तो अजयसिंह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कमलनाथ वैसे तो अपराजेय जैसी छवि वाले नेता हैं। लेकिन विधानसभा चुनावों में छिंदवाड़ा जैसी सीट से उनके खास सिपहसालार दीपक सक्सेना हार गए थे।