अशोकनगर जिला अदालत ने 7 साल पहले गैंगरेप की झूठी रिपोर्ट दर्ज करने वाली महिला और उसके साथी को 10 साल की सजा सुनाई है। डीएनए टेस्ट के बाद गैंगरेप का सच सामने आया था। आरोपियों पर 2-2 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।
मामला 2014 का है। 46 वर्षीय महिला ने पुलिस में रिपोर्ट लिखाई थी कि उसके साथ गैंगरेप हुआ है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ 376(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया था। जांच-पड़ताल के बाद आरोपियों की गुजारिश पर पुलिस ने डीएनए टेस्ट कराया था। रिपोर्ट में सामने आया कि महिला से मिले सैम्पल्स में आरोपियों का डीएनए मैच नहीं हुआ है। पुलिस ने गोपाल और एक अन्य व्यक्ति का डीएनए टेस्ट कराया। उसके बाद महिला और उस अन्य व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया गया। अशोकनगर कोर्ट ने बुधवार को दोनों आरोपियों को 10 साल की सजा सुनाई।
महिला के पति की 2011 में मौत हो गई
झूठा आरोप लगाने वाली महिला के पति की 2011 में मौत हो गई थी। 2014 में उसने चार लोगों पर गैंगरेप का आरोप लगाया था। इन चारों का महिला और उसके दामाद से झगड़ा होता था। पुलिस ने उस समय चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। महिला की मेडिकल जांच में शारीरिक संबंध बनाने की पुष्टि हुई थी। आरोपियों के डीएनए से महिला के सैंपल का मिलान नहीं हआ। रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि महिला और उसके दामाद के बीच शारीरिक संबंध थे। दामाद गोपाल रजक ने भी अपनी सास से रिश्ते होने की बात कबूल की थी।