जब इस बारे में बच्चों से बात की गई तो कुछ और ही कहानी सामने आई। एक मीडिया वेबसाइट द्वारा की गई केस स्टडी से पता चला कि बच्चों के पास पर्याप्त कपड़े तक नहीं हैं। अडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज (एडीजी) द्वारा डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी तो अगस्त 13, 2018 में एक खत लिखा गया।
उसमें उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले जिन आश्रय गृहों में लड़कियां रह रही हैं, वहां उनके पास पर्याप्त इनरवियर और कपड़े तक नहीं हैं। यह खत एडीजी ने उन आश्रय गृहों का दौरा करने के बाद लिखा। उन्होंने कहा कि बच्चों की मदद की जाए ताकि उनकी आधारभूत आवश्यकताएं पूरी हो सकें।
वहीं भोपाल के सरकारी आश्रय गृह में रहने वाले 20 साल के अनाथ बबलू का कहना है कि वह पढ़ने लिखने में बहुत अच्छा है। वह अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहता है। लेकिन उसके 18 साल का होते ही उसे आश्रय गृह छोड़कर चले जाने को कहा गया।
पुनर्वास सेवाओं की कमी के कारण बच्चों को स्कूल तक छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। वह जब अपने रिश्तेदारों के घर जाते हैं तो वह भी उन्हें अपने पास रखने से मना कर देते हैं। वहीं अगर बबलू की बात करें तो उसके 10वीं की बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक आए थे। जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक समूह ने उसकी आगे की पढ़ाई में सहायता करने को कहा। अब बबलू शारदा विद्या मंदिर स्कूल में पढ़ रहा है और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है।