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एमपी: 41 दिन बाद पन्ना जेल से रिहा हुईं दिव्या अहिरवार, हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

Sun, 08 Nov 2026 12:21 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पन्ना

सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता और पार्षद दिव्या अहिरवार 41 दिन बाद पन्ना जेल से रिहा हो गईं। अदालत ने पुलिस कार्रवाई और दर्ज प्राथमिकियों की मंशा पर सवाल उठाए। दिव्या के समर्थन में 12 गांवों के करीब 500 ग्रामीण जेल पहुंचे। उनका आंदोलन मुआवजे और पुनर्वास की मांग से जुड़ा है।
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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य विकास योजनाओं से प्रभावित परिवारों के मुआवजे व पुनर्वास की मांग कर रहीं सामाजिक कार्यकर्ता दिव्या अहिरवार शनिवार को पन्ना जिला जेल से बाहर आ गईं। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर स्थित मुख्य पीठ में न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की अदालत ने पुलिस की कार्रवाई और दर्ज प्राथमिकियों की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्हें जमानत प्रदान की। दिव्या 41 दिन बाद जेल से रिहा हुईं। इस अवसर पर 12 गांवों के करीब 500 ग्रामीणों ने जेल पहुंचकर उनका स्वागत किया और वह अपनी मां से लिपटकर रो पड़ीं।
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नगर परिषद कार्यालय से शुरू हुआ विवाद
छतरपुर जिले के बिजावर स्थित वार्ड-9 से निर्दलीय पार्षद दिव्या अहिरवार की कानूनी लड़ाई अपने क्षेत्र की सफाई व्यवस्था से शुरू हुई थी। बचपन में पिता मुन्नालाल अहिरवार के निधन के बाद मां गौरी बाई ने मजदूरी करके पांच बच्चों का पालन-पोषण किया। एलएलबी की पढ़ाई कर रहीं दिव्या गरीब बच्चों को निशुल्क पढ़ाती भी थीं। पार्षद बनने के बाद जब वार्ड की सफाई न होने पर उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने कचरा उठाकर नगर परिषद कार्यालय के बाहर फेंक दिया। नगर परिषद के मुख्य नगरपालिका अधिकारी की शिकायत पर बिजावर थाने में दिव्या के खिलाफ पहली प्राथमिकी दर्ज की गई।

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जल सत्याग्रह और चिता सत्याग्रह में भागीदारी
इसके बाद दिव्या केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगायां बांध और रुंझ जैसी विभिन्न विकास योजनाओं से प्रभावित परिवारों के हक की आवाज उठाने लगीं। आंदोलनकारी अमित भटनागर के अनुसार, विकास परियोजनाओं के कारण अनेक परिवारों की जमीन तथा मकान अधिग्रहित किए गए, लेकिन उन्हें उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिला। कई पात्र परिवारों के नाम मुआवजा सूची से छूट गए तथा घोषित राहत भी अधूरी रही। प्रभावित नागरिक जमीन और मकान के बदले मुआवजा मिलने के साथ ही रहने और आजीविका के प्रबंध की मांग कर रहे हैं। इन मांगों को लेकर दिव्या ने जल सत्याग्रह तथा चिता सत्याग्रह जैसे विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया। पन्ना के अजयगढ़ क्षेत्र अंतर्गत टपरियां में प्रभावित परिवार अब भी चिता सत्याग्रह कर रहे हैं।

विभिन्न थानों में दर्ज मुकदमे और गिरफ्तारी
दिव्या अहिरवार के खिलाफ बिजावर, किशनगढ़, अजयगढ़ और हनुमतपुर पुलिस थानों में मामले दर्ज हुए हैं। मई 2026 में किशनगढ़ थाना क्षेत्र में पुलिस पर पथराव और हत्या के प्रयास के आरोप में दिव्या तथा अमित भटनागर सहित अन्य लोगों पर मामला दर्ज हुआ था। इसके पश्चात 28 सितंबर को पन्ना के अजयगढ़ क्षेत्र में मझगायां बांध प्रभावितों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। पुलिस ने आरोप लगाया कि दिव्या और उनके सहयोगियों ने एक पुलिसकर्मी की गर्दन दबाकर जान से मारने की कोशिश की। इस मामले में पुलिस ने दिव्या सहित 13 लोगों पर भारतीय न्याय संहिता की छह विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की।
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जनसमर्थन और राजनीतिक हलचल
पुलिस ने 28 सितंबर को दिव्या अहिरवार और हिसाबी राजपूत को हिरासत में लिया था, जिसके विरोध में महिलाओं और स्थानीय ग्रामीणों ने हनुमतपुर पुलिस चौकी का घेराव किया। इसके बाद पुलिस ने दिव्या को 29 सितंबर से पन्ना जिला जेल में रखा। वहीं 30 सितंबर को अमित भटनागर ने अन्य सहयोगियों के साथ थाने पहुंचकर अपनी गिरफ्तारी दी। अमित भटनागर ने पुलिस प्रशासन पर प्रदर्शनकारियों पर गंभीर आरोप लगाने और आंदोलनकारी महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। दिव्या की गिरफ्तारी के उपरांत इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी प्राप्त हुआ। मध्य प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पन्ना जिला जेल पहुंचकर दिव्या से मुलाकात की थी।
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