केंद्रीय पुरातत्व विभाग के अधीन धार स्थित भोजशाला का निरीक्षण करने और इसके इतिहास की जानकारी लेने के लिए इंदौर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी शनिवार दोपहर धार पहुंचे। न्यायाधीशों के आगमन की सूचना मिलते ही सुबह से ही जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया था।
न्यायमूर्ति और अधिकारियों का काफिला सीधे भोजशाला के मुख्य मार्ग तक पहुंचा। इसके बाद चौकी के पास बेरिकेड्स लगाकर आम आवाजाही रोक दी गई। न्यायमूर्ति शुक्ला का निरीक्षण पूरी तरह गोपनीय रखा गया। वे करीब 52 मिनट तक भोजशाला परिसर में रहे। इस दौरान पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने संरचना के संरक्षण के लिए किए गए कार्यों की जानकारी दी। निरीक्षण के समय कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और एसपी मयंक अवस्थी भी मौजूद रहे।
दरअसल, भोजशाला को लेकर वर्ष 2022 में ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ द्वारा इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इस मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने 98 दिनों का सर्वे कर 2189 पृष्ठों की रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की थी। इसके बाद अदालत ने सभी पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी थीं।
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हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ने स्वयं भोजशाला का निरीक्षण करने की इच्छा जताई थी। इसी के तहत वे शनिवार दोपहर करीब 1:30 बजे धार पहुंचे। ऐसे में यह दिन भोजशाला प्रकरण के लिए अहम माना जा रहा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल से शुरू होगी।
निरीक्षण के दौरान न्यायमूर्ति शुक्ला ने परिसर के भीतर स्तंभों की नक्काशी, प्राचीन खंभों पर उकेरी गई आकृतियों और ऐतिहासिक शिलालेखों का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने दीवारों पर अंकित लिपियों को भी ध्यानपूर्वक देखा। साथ ही एएसआई द्वारा किए गए सर्वे के निशानों और चिन्हित स्थलों की जानकारी ली।
सर्वे रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण संरचनात्मक तथ्य सामने आए हैं, जिन पर 2 अप्रैल से शुरू होने वाली सुनवाई में विशेष ध्यान दिया जाएगा। न्यायमूर्ति के दौरे को देखते हुए भोजशाला के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। प्रशासनिक अधिकारियों ने न्यायमूर्ति को परिसर की व्यवस्थाओं और संरक्षण कार्यों की तकनीकी जानकारी भी दी।