दमोह में शराबबंदी का प्रस्ताव पारित हुआ।
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दमोह जिले के कोंडाकला गांव के ग्रामीणों ने गांव में शराबबंदी का फैसला लिया है। प्रस्ताव पारित किया है कि यदि कोई इसका उल्लंघन करता है और शराब पीता है तो उसे गांव से बाहर करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
मध्यप्रदेश सरकार ने नई आबकारी नीति में एक अप्रैल से अहाते बंद किए हैं। इसके बाद लोग अब खुद ही शराबबंदी के लिए जागरुक हो रहे हैं। हाल ही में ग्वालियर-चंबल संभाग के एक गांव में शराबबंदी का फैसला किया गया था। दमोह जिले के जबेरा जनपद के गांव कोंडाकला में शराबबंदी के लिए ग्रामीण एकजुट हुए हैं। ग्रामसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि गांव में कोई भी व्यक्ति अगर शराब पीते मिला तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। इस पर सरपंच, सचिव और पंचों ने मुहर लगाई है। शराब पीने व बेचने वालों खिलाफ पहले तो जुर्माना वसूला जाएगा। फिर भी नहीं माने तो पुलिस के हवाले किया जाएगा। इसके बाद भी बात नहीं बनी तो गांव से बहिष्कार करने जैसे कठोर निर्णय लिए जाएंगे।
70 प्रतिशत लोग पीते हैं शराब
कोंडाकला गांव के 70 प्रतिशत लोग शराब के नशे के आदी हैं। इससे घर की महिलाएं, बच्चे व बुजुर्ग परेशान हैं। गांव को नशामुक्त बनाने के लिए भगवती मानव कल्याण संगठन जिला अध्यक्ष डॉ सुजान सिंह और कोंडाकला सरपंच रचना जितेंद्र राय ने मिलकर प्रस्ताव बनाया। उसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। इसका गांव के सभी लोगों ने समर्थन किया और महिलाओं ने खुशी जाहिर की।