दतिया नगर पालिका परिषद में सोमवार को सियासी भूचाल आ गया। सभा कक्ष में पत्रकार वार्ता कर कई पार्षदों ने अध्यक्ष शांति प्रशांत ढेंगुला के कार्यकाल पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। पार्षद ब्रजेश यादव के नेतृत्व में पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगरपालिका में अध्यक्ष के पुत्र का अवैध हस्तक्षेप है और उनके इशारे पर फर्जी हस्ताक्षरों से करोड़ों के भुगतान कर दिए गए।
पार्षद ब्रजेश यादव ने दावा किया कि नगरपालिका अध्यक्ष के फर्जी साइन कर करीब 35 करोड़ 75 लाख रुपये के भुगतान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह जानकारी उन्हें अकाउंट शाखा में पदस्थ रहे एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से मिली है। आरोप है कि अध्यक्ष पुत्र ने अपनी मां के हस्ताक्षर की हूबहू नकल कर फाइलों को पास कराया। पार्षदों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और हस्ताक्षरों की फॉरेंसिक जांच की मांग की है। इस संबंध में भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों और अपराध शाखा को पत्र भी भेजा गया है। पार्षदों ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष पुत्र रोज शाम करीब 6 बजे नगरपालिका कार्यालय पहुंचते हैं, जब अधिकांश अधिकारी-कर्मचारी जा चुके होते हैं। इसके बाद वह कार्यालय में बैठकर ठेकेदारों और आम लोगों के कामों में दखल देते हैं। पार्षदों ने सवाल उठाया कि एक निर्वाचित अध्यक्ष के परिवार के सदस्य को इस तरह सरकारी कार्यालय में बैठकर फैसले लेने का अधिकार किसने दिया? उन्होंने आरोप लगाया कि इस आड़ में लोगों से वसूली भी की जा रही है।
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पानी पर घेरा
पेयजल व्यवस्था को लेकर भी पार्षदों ने नगरपालिका को घेरा। उनका कहना है कि बारिश के मौसम में भी शहर के कई वार्डों में तीन-तीन दिन में पानी आ रहा है और वह भी इतना गंदा कि बीमारियां फैलने का डर है। जबकि पानी सप्लाई व्यवस्था सुधारने के नाम पर करीब 60 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। तीन नए जनरेटर खरीदे गए, लेकिन वे भी सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। एक जनरेटर एक घंटे में करीब 100 लीटर डीजल पी जाता है, फिर भी मोटर नहीं चल पाती।
आज भी आधा शहर अंधेरे में
पार्षदों ने बताया कि कार्यकाल में करीब एक करोड़ रुपये की स्ट्रीट लाइट और अन्य सामग्री खरीदी गई, लेकिन आज भी आधा शहर अंधेरे में डूबा रहता है। लाइटें या तो जलती नहीं या कुछ दिन में ही खराब हो जाती हैं। पार्षदों का तंज था कि वार्डों में विकास के लिए बजट नहीं है कह दिया जाता है, लेकिन भुगतान के लिए हमेशा पैसा तैयार रहता है। शहर को जलभराव से बचाने के लिए तत्कालीन गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की पहल पर SDRF के तहत 27 करोड़ रुपये की नाला निर्माण योजना स्वीकृत हुई थी। पार्षद यादव ने आरोप लगाया कि चार साल बीत जाने के बाद भी एक भी नाला पूरी तरह नहीं बना है। कई ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर भाग गए। इस योजना में भी बड़े घोटाले की आशंका है।
अनुकंपा नियुक्ति का मुद्दा भी उठा
इसके अलावा सीतासागर तालाब की सफाई के लिए 90 लाख की मशीनें खरीदकर कबाड़ में तब्दील करने और फिर 20 लाख रुपये में दोबारा सफाई कराने, पीएम आवास योजना में किरायेदारों को लाभ न देने, पुरानी रसीदों से अवैध वसूली और नामांतरण में नियमों की अनदेखी जैसे कई आरोप भी लगाए गए। पार्षदों ने अनुकंपा नियुक्ति का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सहायक राजस्व निरीक्षक रहे अरुण उदैनिया के निधन के बाद उनके परिजन को आज तक अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी गई, जबकि उनसे नियुक्ति के नाम पर रकम मांगी जा रही है। पार्षदों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
दतिया नगरपालिका में करोड़ों के घोटाले के आरोप